प्रशासन की मेहनत, गागर में समाया सागर

सीहोर। शनिवार से प्रारंभ हुए रुद्राक्ष महोत्सव के पहले ही दिन जिला प्रशासन और पुलिस की सटीक रणनीति का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला. हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद कुबेरेश्वर धाम परिसर में व्यवस्थाएं पूरी तरह नियंत्रित रहीं और इंदौर-भोपाल हाईवे पर भी यातायात सामान्य रूप से संचालित होता रहा. सुबह और शाम को जरुर वाहनों को डायवर्ट किया गया था. इसके बावजूद व्यवस्थाएं बरकरार बनी रहीं.

शनिवार से कुबेरेश्वर धाम पर रुद्राक्ष महोत्सव प्रारंभ हो गया है. इस मौके पर प्रथम दिवस मंदिर परिसर में हजारों रुद्राक्ष से निर्मित शिवलिंग का पूर्ण पूजन अर्चन के पश्चात दोपहर में कथा का आयोजन किया गया. कथा के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जब तुम्हारे मन में अशांति हो, बैचानी हो दस मिनिट के लिए वृक्ष के नीचे भगवान शिव का ध्यान करें. जब तक हमारा मन शांत नहीं होगा, ईश्वर के प्रति आस्थावान नहीं होगा, तब तक मनुष्य जीवन की सार्थकता नहीं है. कथा के पहले दिन महाराष्ट्र से पैदल चलकर आए एक पिता का पं. मिश्रा ने सम्मान किया. पर्यावरण के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि शादियों में पानी की बर्बादी रोकना अनिवार्य है. पानी की बोतलों पर लिखा होना चाहिए. मैं जल हूं, आने वाला कल हूं यदि हमने आज जल का सम्मान नहीं किया, तो भविष्य में इसके लिए तरसना पड़ेगा.

भगवान की शरण और चरण का अर्थ पंडित जी ने समझाया कि मंदिर में सिर झुकाना भगवान के चरणों में होना है, लेकिन मंदिर से निकलकर कार्यक्षेत्र पर जाते समय भगवान को याद रखना उनकी शरण में होना है.

आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के तहत पार्किंग, यातायात डायवर्जन, सुरक्षा घेरा, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए थे. धाम परिसर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनी रही. धाम परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल, होमगार्ड और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया. सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी की गई. मेडिकल टीम और एंबुलेंस की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई थी, जिससे किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके.

प्रशासन का ट्रैफिक प्लॉन रहा कारगर

इंदौर-भोपाल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए पहले से ही रूट डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती संवेदनशील बिंदुओं पर की गई, जिससे कहीं भी जाम की स्थिति निर्मित नहीं हुई. हालांकि रुद्राक्ष महोत्सव के पहले दिन सुबह से ऑटो और छोटे वाहनों की अधिक संख्या को देखते हुए वाहनों को डायवर्ट मार्गों से निकाला गया. दोपहर 12 बजे से फिर हाईवे को अन्य वाहनों के लिए खोल दिया गया था.शाम को कथा समाप्त होने के पहले फिर छोटे वाहनों को डायवर्ट मार्ग से निकाला गया. शाम छह बजे के बाद फिर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी. भारी वाहनों को पूर्व निर्धारित डायवर्ट मार्गों से निकाला जा रहा है. जिसकी वजह से इस बार किसी प्रकार की अव्यवस्था देखने को नहीं मिली.

रेल प्रशासन की निर्णय से यात्रियों की फजीहत

एक ओर जिला प्रशासन जहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां कर उन्हें अमलीजामा पहना चुका है. जिसकी वजह से पहले दिन सुचारू व्यवस्थाएं देखने को मिलीं, वहीं रेल प्रशासन ने एक बार फिर यात्रियों को परेशानियों का सामना करने को मजबूर कर दिया है. टिकट खिड़की से यात्रियों को टिकट नहीं दिए जा रहे हैं. प्लेटफार्म पर लगे स्टॉल से यात्रियों को टिकट खरीदने के लिए कहा जा रहा है. इसके अलावा प्लेटफार्म क्रमांक एक से दो पर जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज पर यात्रियों का आवागमन रोक दिया है. ऐसे में यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिए लुनिया चौराहा तक का लंबा फैरा लगाना पड़ रहा है, क्योंकि अगर यात्री पटरियों पर उतरकर प्लेटफार्म पर आना जाना करते हैं तो रेलवे पुलिस जुर्माना कर रही है.

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