रोजवास टोल : वसूली में अव्वल, सुविधा देने में फिसड्डी! 

(इरशाद खान) मक्सी।मक्सी से लगभग आठ किलोमीटर दूर एनएच 52 पर रोजवास टोल प्लाजा आमजन के लिए आर्थिक लूट और जानलेवा लापरवाही का प्रतीक बन चुका है. हैरानी की बात यह है कि यहां भारी भरकम टोल टैक्स की वसूली बेरोकटोक जारी है. वहीं बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं नदारद हैं. टोल प्लाजा से पहले वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर तक नहीं बनाए गए. लगता है जिम्मेदार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं.

ओरिएंटल कंपनी द्वारा बनाए गए देवास-मक्सी.शाजापुर सीसी रोड को एनएच-52 का दर्जा तो मिल गया, लेकिन उसकी गुणवत्ता किसी ग्रामीण सडक़ से भी बदतर नजर आती है. आरसीसी सडक़ पर जगह-जगह बब्लिंग, दरारें और उखड़े हुए हिस्से साफ दिखाई देते हैं. सडक़ बनने के बाद से लगातार पैबंद लगाए जा रहे हैं. मानो यह हाईवे नहीं बल्कि प्रयोगशाला का असफल प्रोजेक्ट हो. कुछ दूरी पर मरम्मत कार्य के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती है, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. मक्सी नगर में प्रवेश करने वाला जोड़ चौराहा और देवास-शाजापुर मार्ग के कई हिस्से अब स्थायी रूप से ब्लैक स्पॉट बन चुके हैं. पिछले वर्षों में यहां हुई दुर्घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सडक़ निर्माण और ट्रैफिक प्रबंधन दोनों में गंभीर लापरवाही बरती गई है. सवाल यह है कि जब हादसे लगातार हो रहे हैं, तो जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही.

8 किमी पर ही पहला टोल…

सबसे बड़ी फजीहत मक्सीवासियों एवं मक्सी से सटे ग्रामीणों की हो रही है. जिला न्यायालय, प्रशासनिक और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय शाजापुर आना-जाना उनकी मजबूरी है. लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित रोजवास टोल पर उन्हें हर बार टोल टैक्स चुकाना पड़ता है. स्थिति यह है कि कई बार ईंधन से ज्यादा राशि टोल में चली जाती है. क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव तक सीमित है.

निर्माण एजेंसी पर कार्यवाही क्यों नहीं…?

यह भी सोचने का विषय है कि जब सडक़ की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो निर्माण एजेंसी के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई. क्या जांच केवल फाइलों में सिमटकर रह जाएगी. आखिर जनता से वसूले जा रहे करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा. यह स्पष्ट है कि रोजवास टोल प्लाजा और उससे जुड़ी सडक़ व्यवस्था गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन चुकी है. यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी से प्रशासन और संबंधित कंपनी बच नहीं पाएंगे. अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि जागते हैं या फिर किसी अनहोनी के बाद औपचारिक जांच बैठाकर कर्तव्य की इतिश्री कर दी जाएगी.

कॉल रिसीव नहीं किया…

रोजवास टोल प्लाजा मैनेजर अनिल वर्मा से जब नवभारत संवाददाता ने मोबाइल नंबर 7880097750 पर इन मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करना चाही, तो उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया.

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