
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने शुक्रवार को राज्य सरकार की सौर पंप योजना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी का वादा किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन्हें भारी बैंक ऋण के बोझ तले धकेल दिया गया है।
नायक ने आधिकारिक ऋण स्वीकृति पत्रों और बैंक दस्तावेजों का हवाला देते हुए योजना की वित्तीय संरचना को “गंभीर रूप से चिंताजनक” बताया। पार्टी द्वारा समीक्षा किए गए दस्तावेजों के अनुसार सौर पंप की कुल परियोजना लागत 4,04,475 रुपये दर्शाई गई है, जबकि वास्तविक सब्सिडी मात्र 1,09,537 रुपये दर्ज है। किसानों से 41,537 रुपये मार्जिन मनी के रूप में जमा कराए गए और उनके नाम पर 2,53,402 रुपये का बैंक ऋण स्वीकृत किया गया।
यह ऋण 8.30 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया गया है, जिसकी 84 महीनों तक लगभग 3,987 रुपये मासिक किस्त निर्धारित की गई है। चूक की स्थिति में दंडात्मक ब्याज का भी प्रावधान है।
डॉ. नायक ने सवाल किया कि यदि 90 प्रतिशत सब्सिडी दी गई है तो किसानों पर ढाई लाख रुपये से अधिक का ऋण क्यों डाला गया। उन्होंने वास्तविक सब्सिडी प्रतिशत स्पष्ट करने और इसे पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही पूछा कि क्या किसानों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया था कि 10 प्रतिशत अंशदान जमा करने के बाद भी उन्हें भारी बैंक देनदारी उठानी पड़ेगी।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या बैंकों के माध्यम से सौर कंपनियों को पूरा भुगतान पहले ही जारी कर दिया गया है तथा इस प्रक्रिया में किसी बिचौलिए या कमीशन एजेंट की भूमिका रही है या नहीं।
कांग्रेस नेता ने किसानों पर डाले गए ऋण की पुनर्समीक्षा करने, शेष वित्तीय बोझ सरकार द्वारा वहन किए जाने और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आज भी सिंचाई के लिए 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं और कई गांवों में घरेलू बिजली की नियमित आपूर्ति भी नहीं है। ऐसे में सौर योजना राहत देने के बजाय ऋण आधारित कार्यक्रम बनती दिखाई दे रही है।
डॉ. नायक ने भाजपा और उससे जुड़े किसान मोर्चा की चुप्पी पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि क्या यह मौन समर्थन के समान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान पारदर्शिता चाहते हैं और स्पष्ट जवाब मिलने तक कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी।
