इस्लामाबाद | पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) की ऐतिहासिक जीत पर तारिक रहमान को बधाई संदेश भेजा है। शहबाज शरीफ ने कहा कि वे बांग्लादेश के नए नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए उत्सुक हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पाकिस्तान गुप्त रूप से ‘जमात-ए-इस्लामी’ की जीत की उम्मीद कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि जमात की भारत विरोधी विचारधारा पाकिस्तान के रणनीतिक हितों के अनुकूल थी, लेकिन जनता ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP पर भरोसा जताते हुए उसे 200 से अधिक सीटों पर जीत दिलाई है।
चुनाव नतीजों के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश की जनता ने कट्टरपंथी ताकतों के बजाय विकास और लोकतंत्र को चुना है। ढाका-17 और बोगुरा-6 जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर तारिक रहमान ने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवारों को भारी मतों के अंतर से शिकस्त दी है। बोगुरा-6 में तारिक रहमान को जहाँ 2,16,284 वोट मिले, वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंदी जमात के सोहेल को मात्र 97,626 वोटों से संतोष करना पड़ा। जमात-ए-इस्लामी पूरे देश में महज 60 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
तारिक रहमान की जीत पर जहाँ पाकिस्तान ने भाईचारे की बात कही है, वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई देते हुए ‘समावेशी और प्रगतिशील बांग्लादेश’ के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। पाकिस्तान के लिए स्थिति जटिल है क्योंकि वह ऐतिहासिक रूप से जमात जैसी शक्तियों के जरिए बांग्लादेश में भारत विरोधी एजेंडा चलाने की कोशिश करता रहा है। अब तारिक रहमान के सत्ता में आने से दक्षिण एशिया का शक्ति संतुलन बदलने की उम्मीद है। पाकिस्तान अब औपचारिक रूप से लोकतांत्रिक साझेदारी की बात कर रहा है, लेकिन उसकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार का झुकाव नई दिल्ली और इस्लामाबाद की ओर किस तरह रहता है।

