नयी दिल्ली, 12 फरवरी (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘ बढ़ते कर्ज’ के मुद्दे पर कांग्रेस कांग्रेस पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारों पर कर्ज लेने की सीमा लगी है।
वित्त मंत्री ने राज्य सभा में बजट 2026-27 पर आम चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘ कांग्रेस बढ़ते कर्ज पर घड़ियाली आंसू बहाती है। वे चाहते हैं कि हम और अधिक कर्ज लें और (उसमें से) राज्यों को भी धन जारी करें। ‘
उन्होंने कहा, ‘ मैं कहना चाहूंगी कि सरकार अत्यधिक कर्ज नहीं ले सकती। यही हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत है। कांग्रेस कहती है कि इस मद में कितना पैसा दिया, इसमें कितना पैसा दिया।” श्रीमती सीतारमण ने कहा, ‘ कांग्रेस व्यय को लेकर अति चिंतित है, लेकिन हम कहते हैं कि हम आपको पैसा देंगे, लेकिन आपको हमें परिणाम देने होंगे। हमें परिणाम चाहिए।’
उन्होंने कहा, ‘ कांग्रेस को खर्च की फिक्र है, हमें परिणाम की।’
अपने जवाब के दौरान उन्होंने तमिलनाडु में वर्तमान एमके स्टालिन सकरार के दौरान राज्य पर कर बोझ में चार लाख करोड़ रुपये की वृद्धि संबंधी बयान का उल्लेख किया। इस पर विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया।
कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वित्त मंत्री यह बात इसलिए उठा रही है क्योंकी वहां विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और भाजपा का अन्ना द्रमुक के साथ गठबंधन हो रहा है। इस बीच अन्ना द्रमुक के डॉ एम थम्बीदुरै ने भी बोलना शुरू कर दिया और सदन में शोर शराबा बढ़ गया।
वित्त मंत्री ने श्री खरगे की टिप्पणी के जवाब में कहा कि इस तरह क्या यह नहीं है कि श्री खरगे तमिलनाडु में कर्ज का बोझ बढ़ने के मुद्दे पर इसलिए बोलने को उठ गये क्योंकि उनकी पार्टी का वहां द्रमुक से गठबंंधन है।
