नयी दिल्ली, 12 फरवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि राज्य में लंबे समय से लंबित ग्राम समिति के चुनाव आगामी ‘त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद’ चुनावों के साथ ही संपन्न कराए जाएं। शीर्ष अदालत के इस फैसले से जनजातीय क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
एडीसी की सत्ताधारी पार्टी ‘टिपरा मोथा’ ने पिछले साल अक्टूबर में ग्राम समिति चुनावों में हो रही देरी को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पार्टी के संस्थापक प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने शीर्ष अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने पिछले लगभग दस वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक जड़ता और चुनावी देरी को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया है।
संविधान की छठी अनुसूची के तहत आने वाले इन क्षेत्रों में ग्राम समिति के चुनाव जमीनी स्तर के शासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पिछले कई वर्षों से इन चुनावों के न होने के कारण जनजातीय समुदायों के बीच काफी असंतोष था।
