इंदौर: देश के कई राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. तकनीकी खामियों, मानवीय चूकों और कथित राजनीतिक दुरुपयोग के चलते मतदाता सूची की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं.विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया, लेकिन इस दौरान अनेक तकनीकी और मानवीय चूक सामने आ रही हैं. जानकारी के अभाव, दस्तावेजों की कमी और समय पर सत्यापन न होने के कारण बड़ी संख्या में आम नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो पाए या काट दिए गए. इससे मताधिकार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि आम नागरिकों को स्वयं अपनी मतदाता स्थिति की जांच करनी चाहिए तथा आधार पहचान पत्र और पते से जुड़े दस्तावेज समय रहते उपलब्ध कराएं. बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) से निरंतर संपर्क बनाए रखना भी आवश्यक बताया गया है. किसी भी त्रुटि की स्थिति में तय समय-सीमा के भीतर सुधार आवेदन करना जरूरी है. इधर, राजनीतिक माहौल के बीच फॉर्म नंबर 7 के दुरुपयोग की आशंकाएं भी सामने आई हैं. आरोप है कि कुछ तत्व राजनीतिक लाभ के लिए बिना संबंधित व्यक्ति की जानकारी के नाम हटाने के आवेदन कर सकते हैं. प्रशासन से मांग की जा रही है कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो.
यह बोले जागरूक नागरिक
फॉर्म नंबर 7 का दुरुपयोग कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है. इसकी सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी हैं बीएलओ और अधिकारियों के संपर्क कर उनसे सलाह लें.
– सलीम पठान, युवा नेता
हमारी एक छोटी सी लापरवाही हमारा वोट छीन सकती है. युवाओं को खासतौर पर दस्तावेज और सत्यापन को लेकर सतर्क रहना चाहिए. परिवार और आसपास के लोगों का भी सहयोग करें.
– मेहर सिंह टक्कर, ट्रांसपोर्टर
मतदाता सूची से नाम कटना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है. हर नागरिक को जागरूक होकर अपनी स्थिति जांचनी चाहिए और किसी भी गड़बड़ी की शिकायत तुरंत दर्ज करानी चाहिए.
– इरफान खान, समाजसेवी
