जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने बुरहानपुर के जिला प्रशासन और वन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वन वृक्षों से सलाई गोंद और धवड़ा गोंद निकालने पर लगे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करें। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में वन विभाग के प्रमुख सचिव, कलेक्टर, एसपी, सीसीएफ व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की है।
यह जनहित का मामला बुरहानपुर निवासी शौकत अली और जितेंद्र राउतोले की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता अहदुल्ला उसमानी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संभागीय वन अधिकारी की एक जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि 89 प्रतिशत सलाई वृक्ष और 73 प्रतिशत धवड़ा वृक्ष क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कृत्रिम रसायनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सलाई और धवड़ा वृक्षों को नुकसान हो रहा है।
न्यायालय को बताया गया कि रासायनिक पदार्थों के प्रयोग के साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए कई पेड़ों को जलाया जा रहा है। आरोप है कि बुरहानपुर वन प्रभाग के वन वृक्षों से सलाई गोंद और धवड़ा गोंद निकालने पर प्रतिबंध होने के बावजूद, लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं और सलाई और धवड़ा वृक्षों से गोंद निकाली जा रही है। जिसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने उक्त निर्देश देते हुए अनावेदकों से जवाब तलब किया है।
