जबलपुर: कुण्डम रोड स्थित ग्राम अमझर में बन रहे रिंग रोड का कार्य जहां शहर के विकास की नई तस्वीर गढ़ रहा है, वहीं सड़क किनारे पिछले लगभग 30 वर्षों से रह रहे कई परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। निर्माण कार्य के चलते घरों और दुकानों को हटाया जा रहा है। प्रभावित रहवासियों ने पीडब्ल्यूडी विभाग से आर्थिक सहायता की मांग की है ताकि वे दूसरी जगह अपने रहने और रोजगार की व्यवस्था कर सकें।
बाद में पता चला सरकारी जमीन पर है हिस्सा
स्थानीय निवासी संतोष कुमार मेहरा ने बताया कि करीब 30 साल पहले यह जमीन एक आदिवासी परिवार की थी, जिसके बाद समय-समय पर भूमि का क्रय-विक्रय होता रहा। उन्होंने बताया, “किसी महावीर नाम के व्यक्ति ने यहां रहने की अनुमति दी थी। तभी से हम यहीं रहकर गुजर-बसर कर रहे हैं। अब रिंग रोड निर्माण शुरू हुआ तो पता चला कि हमारे मकान और दुकान का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर है, जो सड़क में जा रहा है। हमारे पास और कोई ठिकाना नहीं है।
विकास का विरोध नहीं, बेघर होना बड़ा संकट
प्रभावित परिवारों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे दूसरी जगह मकान और रोजगार की व्यवस्था कर सकें। उनका कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन पुनर्वास के बिना बेघर होना उनके लिए बड़ा संकट है।
इनका कहना है
ग्राम अमझर में रहने वाले जिन परिवारों के घर रिंग रोड में जा रहे हैं, उनको तहसीलदार के यहां से नोटिस जारी हुए हैं, जिनको मुआवजा भी दिया जाएगा। लेकिन जो सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, फिलहाल उनके लिए पीडब्लूडी विभाग ही अपने राजस्व से कुछ आर्थिक सहायता कर सकता है।
अनिकेत महोबिया, पटवारी
