जबलपुर:आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल द्वारा दर्ज वर्ष 2015 के कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जबलपुर मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने ग्राम पंचायत मोहास के तत्कालीन सरपंच गौरीशंकर पटेल और सचिव दीपा चतुर्वेदी सहित अन्य आरोपियों को नियमित जमानत प्रदान की है। अदालत ने गौरीशंकर पटेल, दीपा चतुर्वेदी, शेख मोहम्मद मेहबूब खान, संतोष कुमार असाटी और प्रशांत शर्मा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 483 के तहत 50-50 हजार रुपये की जमानत और समान राशि के व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
सहआरोपी सुनील कुमार रोहित को पूर्व में ही जमानत मिल चुकी थी। मामला ग्राम पंचायत मोहास के अंतर्गत बघोरी में खेल मैदान समतलीकरण कार्य में कथित रूप से फर्जी बिलों के आधार पर 1,56,704 रुपये के भुगतान से संबंधित है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अभिषेक पटेल ने सरपंच गौरीशंकर पटेल और सचिव दीपा चतुर्वेदी की ओर से पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि प्रकरण में वर्ष 2015 से अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जांच पूर्ण होकर 23 दिसंबर 2025 को अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है और सभी दस्तावेज जब्त हैं, जिससे साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका नहीं है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए माना कि केवल अभियोग पत्र प्रस्तुत होने के आधार पर गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है। इसी आधार पर सभी आरोपियों को शर्तों सहित जमानत दी गई तथा गौरीशंकर पटेल के विरुद्ध पूर्व में जारी गिरफ्तारी वारंट निरस्त कर दिया गया। प्रकरण को अब आरोप पूर्व तर्क के लिए 27 फरवरी 2026 को नियत किया गया है।
