
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की श्रमिक नीतियों और श्रम संहिताओं में किए गए बदलावों के विरोध में गुरुवार को बैंक कर्मचारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस आंदोलन को केवल बैंकिंग क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए बीमा सेक्टर की प्रमुख यूनियनों एलआईसी और जीआईसी ने भी समर्थन दिया है, जिससे वित्तीय सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, हड़ताल के दौरान देश के विभिन्न शहरों में सुबह 10 बजे से आमसभाएं और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। यूनियन नेताओं का कहना है कि हाल में लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं में ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जिन्हें वे कर्मचारी हितों के खिलाफ मानते हैं। उनका आरोप है कि इन बदलावों से नौकरी की सुरक्षा, कार्यघंटों और श्रमिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हड़ताल के चलते गुरुवार को सरकारी और निजी बैंकों की शाखाओं में कामकाज धीमा रहने, नकद लेनदेन, चेक क्लियरिंग, लोन संबंधी प्रक्रियाओं और बीमा सेवाओं में बाधा आने की आशंका है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रहने की उम्मीद जताई जा रही है, फिर भी ग्राहकों को जरूरी काम पहले निपटाने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हड़ताल को व्यापक समर्थन मिला तो इसका असर न केवल बैंकिंग और बीमा क्षेत्र पर बल्कि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों की दैनिक वित्तीय गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है। यूनियनों ने सरकार से श्रम संहिताओं की पुनर्समीक्षा और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।
