जबलपुर: जिले में 20 जनवरी को समाप्त हुए धान उपार्जन के बाद अब एक बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगी हैं। इस सीजन में 55 हजार पंजीकृत किसानों में से 50 हजार 662 किसानों ने सरकार को 37 लाख क्विंटल से अधिक धान बेचा, लेकिन जांच में सामने आया है कि कई उपार्जन समितियों और समूहों में फर्जी किसानों के नाम पर धान की खरीदी कर सरकारी भुगतान भी ले लिया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे गंभीर मामला मझौली उपार्जन केंद्र का सामने आया है, जहां सिहोरा, शहपुरा, पनागर, पाटन, कुंडम और जबलपुर तहसील तक के किसानों ने पंजीयन कर धान बेचा है। नियमों के अनुसार किसान केवल अपनी तहसील या निकटतम केंद्र पर ही पंजीयन करा सकता है, बावजूद इसके यहां बड़े पैमाने पर नियमों को ताक पर रखा गया।
गुणवत्ताहीन और पुराना धान भी खपाया गया
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कई जगह किसानों के नाम पर व्यापारियों ने पुराना और गुणवत्ताहीन धान बेचा है। शासन द्वारा फर्जी पंजीयन रोकने के लिए नोडल अधिकारी, समितियां और नियमित बैठकें की गईं, इसके बावजूद यह गड़बड़ी होना अधिकारियों की मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है।
एफआईआर हुई, लेकिन जांच अधूरी
मझौली उपार्जन केंद्र में फर्जीवाड़े के मामले में समिति के प्रभारी प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर पर एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन अभी तक सभी पंजीकृत किसानों का सत्यापन नहीं हो पाया है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिनमें संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिन समितियों को नोटिस दिए गए थे, वहां जांच की रफ्तार धीमी होने और कार्रवाई न होने से प्रशासन की निष्क्रियता पर आरोप लग रहे हैं। विदित है कि लगभग 10 दिन पहले कुंडम के गुरुनानक वेयरहाउस में प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन मझौली वृत्ताकार सेवा समिति के प्रबंधक पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
वेयरहाउस अधिग्रहण के बाद बढ़ा खेल
इस सीजन में कई निजी वेयरहाउस संचालकों ने धान रखने से इनकार किया, जिसके बाद वेयरहाउस कॉर्पोरेशन ने उन्हें अधिग्रहित किया। आरोप है कि इन वेयरहाउस से जुड़ी सोसायटियों में धान उपार्जन के दौरान जमकर फर्जीवाड़ा हुआ, जिसकी अब अलग से जांच की जा रही है।
