सीहोर। पश्चिम रेलवे को सर्वाधिक राजस्व देने वाले रेलवे स्टेशनों में शामिल सीहोर रेलवे स्टेशन आज यात्रियों की नजर में बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है. भारी कमाई के बावजूद न तो पर्याप्त ट्रेनों का स्टॉपेज दिया जा रहा है और न ही कोरोना काल में बंद की गई ओवरनाइट व अन्य महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनों को अब तक बहाल किया गया है.
गौरतलब है कि 14 फरवरी से कुबेरेश्वर धाम पर शुरू होने जा रहे रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, लेकिन रेलवे प्रशासन की तैयारी शून्य नजर आ रही है. यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो श्रद्धालुओं की फजीहत तय मानी जा रही है, क्योंकि कई ट्रेनों का स्टापेज छह साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है. ओवरनाईट एक्सपे्रस सहित अनेक महत्वपूर्ण गाडिय़ों के सीहोर रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकने के कारण देश भर से आने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. या तो उन्हें भोपाल, बैरागढ़ के स्टेशन पर उतरना पड़ता है या फिर शुजालपुर जैसे छोटे स्टेशन से सीहोर आना पड़ता है. ऐसे में सर्वाधिक परेशानी बुजुर्ग व महिला यात्रियों को होती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए की आय देने वाला सीहोर स्टेशन यदि आज भी इस हाल में है तो इसके लिए रेलवे प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी जिम्मेदार है. ट्रैन स्टॉपेज के लिए अब तक न तो कोई ठोस पहल की गई और न ही यात्रियों की मांगों पर ध्यान दिया गया.
पश्चिम रेलवे को होती है भारी भरकम आय
गौरतलब है कि सीहोर के समीपस्थ ग्राम चितावलिया हेमा स्थित कुबेरेश्वर धाम पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आना बना रहता है. प्रमुख धार्मिक अवसरों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है. ऐसे में अनेक ट्रेनों का स्टापेज नहीं होने के कारण देश भर के कोने- कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. वह भी तब जबकि वह पश्चिम रेलवे को भारी- भरकम राजस्व अदा करते हैं. इसके बाद भी ट्रेनों का स्टॉपेज नहीं होने के अलावा रेलवे स्टेशन पर अनेकानेक खामियों से यात्री दो चार होते हैं और काफी कड़वी यादें लेकर व रेलवे प्रशासन को कोसते हुए जाते हैं.
कोरोनाकाल में बंद हुई थीं अनेक रेलगाडिय़ां
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में महामारी कोरोनाकाल के दौरान रेल प्रशासन द्वारा तमाम रेलगाडिय़ों का परिचालन बंद कर दिया था. कोरोना के बाद रेलें चलना प्रारंभ हुईं, लेकिन ओवरनाईट एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का स्टॉपेज छह साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है. जिससे रोजाना अपडाउन करने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं तो अन्य शहरों से आने वाले यात्री भी स्टापेज नहीं होने की दशा में भोपाल व अन्य शहरों के स्टेशनों पर उतरने को मजबूर होते हैं. भोपाल से सीहोर आने वाले यात्री रमेश शर्मा ने कहा, कई ट्रेनों का स्टॉपेज बंद कर दिया गया है. रात में ट्रेन नहीं रुकती तो मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ता है. कमाई सीहोर से और सुविधा कहीं और, यह कैसा न्याय है?इंदौर से कुबेरेश्वर धाम दर्शन को आने वाले श्रद्धालु संतोष पटेल ने नाराजगी जताते हुए कहा, रुद्राक्ष महोत्सव में हर साल भारी भीड़ आती है. पहले से ट्रेनों का ठहराव नहीं दिया गया तो श्रद्धालुओं को भारी परेशानी होगी. रेलवे प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है. सीहोर निवासी गीता बाई का कहना है, कोरोना को खत्म हुए बरसों हो गए, लेकिन तब बंद की गई ट्रेनें आज तक शुरू नहीं की गईं. महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है. इसी तरह धार्मिक नगरी उज्जैन से आए श्रद्धालु पंकज त्रिवेदी ने कहा, जब कुबेरेश्वर धाम जैसे बड़े धार्मिक आयोजन हो रहे हों, तब रेलवे को अतिरिक्त ट्रेनें और स्टॉपेज देना चाहिए. लेकिन यहां उल्टा हो रहा है.
इन गाडिय़ों का स्टॉपेज होना आवश्यक
ट्रेन का नाम एवं क्रमांक यात्रा का स्थान
22191-22192 ओवर नाईट एक्सप्रेस इन्दौर से जबलपुर
20813-20814 पुरी जोधपूर एक्सप्रेस पुरी से जोधपूर
19313-19314 पटना एक्सप्रेस इन्दौर से पटना
22911-22912 क्षिप्रा एक्सप्रेस इन्दौर से हावड़ा
19489-19490 गोरखपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद से गोरखपुर
17019-17020 हैदराबाद एक्सप्रेस जयपुर से हैदराबाद
20413-20414 महाकाल एक्सप्रस इन्दौर से वाराणसी
14115-14116 प्रयागराज एक्सप्रेस इन्दौर से प्रयागराज
