भोपाल न्यायिक सम्मेलन में डिजिटल व्यवस्था, भाषाई समावेशन और लंबित मामलों के समाधान पर सहमति

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों ने न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने पर व्यापक मंथन किया। सम्मेलन में अब तक डिजिटल तकनीक के उपयोग, बहुभाषी न्यायिक प्लेटफॉर्म विकसित करने, लंबित मामलों को कम करने की रणनीतियों और न्यायिक प्रशासन को डेटा-आधारित ढांचे में ढालने जैसे मुद्दों पर सहमति उभरती दिखाई दी है।

चर्चा के दौरान अदालतों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों को उनकी मातृभाषा में न्यायिक सूचनाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मुकदमों के बैकलॉग को कम करने और सुनवाई प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उपायों पर भी विचार हुआ। सम्मेलन में मीडिया ट्रायल के प्रभाव और न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे।

अब तक की चर्चाओं से संकेत मिलते हैं कि न्यायपालिका को अधिक सुलभ, पारदर्शी और दक्ष बनाने की दिशा में ठोस पहल पर सहमति बन रही है, जबकि अंतिम निष्कर्ष और औपचारिक प्रस्ताव के जल्द जारी किए जाने की संभावना है।

 

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