भारतीय कुटुंब एक सामाजिक संरचना नहीं, संस्कारों की प्रयोगशाला

इंदौर: सत्र नियोजन युवा महोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय युवा महोत्सव के द्वितीय दिवस देवी अहिल्या विश्व विद्यालय के लक्ष्मीशिला परिसर, भवकुआं में वैचारिक ऊर्जा, राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत वातावरण देखने को मिला. आओ मिलकर बढ़ें, श्रेष्ठ भारत गढ़ें के संकल्प वाक्य के साथ आयोजित इस महोत्सव में युवाओं की भारी सहभागिता रही.

द्वितीय दिवस के पहले सत्र में नेहा मित्तल एवं सोनल सिसोदिया ने भारतीय कुटुंब व्यवस्था की महत्ता पर विचार व्यक्त किए. नेहा मित्तल ने रोचक कथाओं के माध्यम से परिवार की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा- भारतीय कुटुंब केवल एक सामाजिक संरचना नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला है. यहाँ त्याग, सह-अस्तित्व और जिम्मेदारी के संस्कार पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होते हैं. वहीं सोनल सिसोदिया ने कहा जब परिवार सशक्त होता है, तब समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त हो जाते हैं.

हमारी सभ्यता की शक्ति हमारी मातृशक्ति और पारिवारिक संस्कारों में निहित है. द्वितीय सत्र में रजत जैन ने युवाओं को उद्यमिता की ओर अग्रसर होने का आह्वान करते हुए कहा 2047 का भारत केवल सरकारों से नहीं, बल्कि आज के युवाओं के चरित्र, कौशल और राष्ट्रनिष्ठा से बनेगा. युवा यदि जागरूक है, तो भारत अजेय है. आशुतोष ठाकुर ने आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए कहा रोज़गार मांगने वाला युवा नहीं, बल्कि रोज़गार देने वाला युवा ही भारत का भविष्य लिखेगा. वहीं सिद्धार्थ सिंह ने शिक्षा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना प्राप्त करना नहीं, अपितु व्यक्तित्व निर्माण करना है.

भारत भविष्य का मार्गदर्शक
दोपहर बाद आयोजित सत्र में मनोज श्रीवास्तव ने कहा भारत केवल अतीत की महिमा नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शक भी है. वेद, उपनिषद और भारतीय दर्शन आज भी वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करते हैं. दिवस के अंतिम वैचारिक सत्र में न्यायमूर्ति रोहित आर्य, संतोष सिंह जी एवं अनुभूति उपाध्याय ने भारत के समक्ष उपस्थित वैचारिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे.

भावोदय मंच, सैन्य प्रदर्शनी और सांस्कृतिक संध्या
पूरे दिन भावोदय प्रतिभाओं के मंच पर युवाओं ने विभिन्न विधाओं में अपनी प्रस्तुतियाँ दीं. भारतीय सेना द्वारा लगाई गई विशेष सैन्य आयुध प्रदर्शनी युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही. शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ने पूरे दिन के वैचारिक मंथन को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की. देशभर से आए कवियों ने राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और युवा चेतना पर प्रभावशाली काव्यपाठ किया.

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