भरहुत पुरातत्व स्थल के निकट पर बोरी में बंद मिला नवजात

सतना : जिले के उचेहरा क्षेत्र में शनिवार की सुबह उस वक्त मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई जब भरहुत पुरातत्व स्थल के निकट निर्जन क्षेत्र में बोरे के अंदर एक नवजात बिलखता पाया गया. यह तो गनीमत रही समय रहते स्थानीय रहवासियों की नजर उस पड़ गई और आनन-फानन में उपचार शुरु होने पर उसका उपचार शुरु हो गया. इसके साथ ही घटना का दूसरा पहलू यह भी देखने को मिला कि मानवता का धर्म निभाने में पुलिस व मेडिकल स्टाफ सहित स्थानीय रहवासियों ने कोई कसर नहीं रख छोड़ी.

जिले के उचेहरा क्षेत्र में विश्वविख्यात पुरातत्व स्थल भरहुत मौजूद है. जहां पर चंद्रगुप्तकालीन कई अवशेष रखे हुए हैं. लेकिन इसी स्थल की चहरदिवारी के अंदर शनिवार की सुबह किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई देने लगी. सुबह सवेरे शौच क्रिया के लिए उस ओर गए कुछ रहवासियों ने जब ध्यान दिया तो बच्चे के रोने की आवाज एक बोरे के अंदर से आ रही थी. ग्रामीणों ने फौरन ही सरपंच माया देवी को घटना की सूचना दी. सरपंच की सूचना पर उचेहरा थाने के सउनि संतोष सिंह, आ. कौशल गुर्जर व आ. शिवानी मेहरा मौके पर पहुंच गए. नवजात का शरीर काफी ठंडा महसूस हो रहा था. लिहाजा आनन-फानन में उसे उपचार के लिए उचेहरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया.

जहां पर बीएमओ डॉ. ए के राय, चिकित्सक डॉ विनीत गुप्ता, डॉ. अनामिका राय, डॉ. श्रुति अग्रवाल और स्टॉफ नर्स अनीता तोमर ने बिना समय गंवाए उपचार शुरु कर दिया गया. नवजात के शरीर की सफाई करने के साथ ही लटक रहे नाड़े को काटा गया. चिकित्सकों के अनुसार नवजात ने लगभग 2 घंटे पहले ही जन्म लिया. लेकिन यदि उसे अस्पताल लाने में थोड़ी और देर हो जाती तो उसे बचाना मुश्किल हो जाता. नवजात की हालत में सुधार होने पर उसे आगे के उपचार के लिए जिला चिकित्सालय की गहन शिशु चिकित्सा इकाई के लिए रेफर कर दिया गया. जहां पर उपचार के बाद लगभग साढ़े 3 किलो वजनी नवजात को स्वास्थ्य बताया जाने लगा. वहीं इस मामले में जानकारी देते हुए उचेहरा थाना प्रभारी सतीश मिश्र ने बताया कि जांच की जा रही है. संभावना है कि सामाजिक दबाव अथवा पारिवारिक कारणों के चलते बच्चे को जन्म देने के बाद लावारिस हालत में छोड़ दिया गया होगा. पुलिस द्वारा आसपास के गांव, स्वास्थ्य केंद्र और आशा कार्यकत्र्ताओं के जरिए जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है.
  मानवता की हुई जीत
एक ओर जहां लावारिस हालत में नवजात को मरने के लिए छोड़ देने जैसी मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई. लेकिन वहीं दूसरी ओर नवजात को बचाने और उसकी देखभाल करने के लिए उठे कई हाथों से मानवता की जीत होती भी दिखाई दी. डायल 112 के पुलिसकर्मियों समेत अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा नवजात को सुरक्षित रखने के प्रयास की लोगों ने खासी सराहना की. इसी कड़ी में जब नवजात को अस्पताल ले जाया गया तो वहां मौजूद कुछ महिलाओं ने अपने मातृत्व धर्म का पालन करते हुए नवजात को दूध पिलाया. वहीं गांव की सरपंच माया देवी ने नवजात की पूरी देखभाल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली. सरपंच का कहना है कि जब तक प्रशासन द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया जाता तब जक वे नवजात को अकेला नहीं छोड़ेंगी.

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