सप्त सागरों पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम सख्त, वीडी मार्केट की फाइल फिर खुलेगी

उज्जैन। स्कंद पुराण में जिन उज्जैन के सप्त सागरों का उल्लेख है। उनकी अनदेखी के चलते धार्मिक भावनाएं आहत हो रही है। शहर के सप्त सागरों में से कई सागरों पर अवैध निर्माण अतिक्रमण हो चुके हैं। जिसमें से एक गोवर्धन सागर का भी नंबर पहले लग चुका है, सागर की जद में बनी दुकानों का मामला लंबे समय से चल रहा है अब एक बार फिर वीडी मार्केट की फाइल भी खुलने वाली है।

नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार वीडी मार्केट के अंदर जो अवैध दर्जन भर दुकानें बनाई गई है। उनका एक हिस्सा गोवर्धन सागर पर आ रहा है सर्वे नंबरों की हेराफेरी से लेकर तत्कालीन जिम्मेदारों ने लापरवाही और स्वहितों की पूर्ति कर ली थी। जिसके कारण लगातार अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो गए। ऐसे में गोवर्धन सागर संकुचित हो गया यही कारण है कि इसको लेकर यदाकदा कार्रवाई भी पूर्व में हुई है।

 

एनजीटी के सख्त आदेश-आयुक्त ने ली सुध

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा सप्तसागरों एवं जलस्त्रोतों को साफ, स्वच्छ रखे जाने तथा आस पास से अतिक्रमण हटाए जाने के संबंध में निर्देश दिए गए थे। वीडी मार्केट के ठीक पीछे धार्मिक महत्व का गोवर्धन सागर है जिसका पूजन अर्चन धार्मिक श्रद्धालु महिलाओं द्वारा किया जाता है। ऐसे में उस पर कब्जे को लेकर भी एनजीटी ने पूर्व में आदेश दिए थे, जिन्हें अब तक हटाया नहीं गया। एनजीटी की जो आदेश है उसके क्रम में निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा द्वारा शुक्रवार को समीक्षा बैठक में निर्देशित किया था कि सप्त सागरों पर सफाई कार्य किया जाए। इसी क्रम में शनिवार को नगर निगम स्वास्थ्य विभाग अमले द्वारा क्षीरसागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर एवं दो तालाब पर विशेष सफाई अभियान कार्य प्रारंभ किया गया। आयुक्त अभिलाष मिश्रा द्वारा निर्देशित किया गया की सप्तसागरों का शासकीय रिकॉर्ड अनुसार मौके पर सर्वे करके और अतिक्रमण होने पर हटाने की कार्रवाई एवं सफाई कार्य किए जाने के निर्देश दिए गए। साथ ही भवन अधिकारी एवं भवन निरीक्षकों को निर्देशित किया गया कि एनजीटी द्वारा दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए सप्त सागर से अतिक्रमण हटाते हुए विशेष सफाई कार्य किया जाए तथा 07 दिवस में की गई कार्रवाई की रिपोर्टिंग दी जाए। विदित हो कि जिन सप्त सागरों को अतिक्रमण कर कब्जा किया गया है। उनका अपने आप में काफी महत्व पुराणों में बताया गया लेकिन फिर इन पर अब तक किसी की नजर नहीं पड़ी थी। लेकिन निगम आयुक्त ने धार्मिक महत्व को समझते हुए और आने वाले सिंहस्थ में स्नान को दृष्टिगत रखते हुए इनकी सुध लेकर अतिक्रमण हटाने के साथ सफाई करने के निर्देश दिए हैं।

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