
जबलपुर। अवमानना मामले में सजा निर्धारित किये जाने से पूर्व महिला आईएएस अधिकारी को हाईकोर्ट की युगलपीठ से राहत मिल गयी। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने आईएएस महिला अधिकारी को अवमानना का दोषी ठहराते हुए सजा निर्धारित करने शुक्रवार को सुनवाई निर्धारित की थी। महिला आईएएस अधिकारी की तरफ से दायर अपील की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी किये है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की गयी है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की गयी है।
नगर निगम भोपाल के द्वारा मर्लिन बिल्डकॉन प्रा लि. कि श्यामला हिल्स स्थित नादिर कॉलोनी में स्थित उसकी 3520 वर्ग फीट में बिल्डिंग की अनुमति 28 अगस्त 2025 को निरस्त कर दी गयी थी। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान नगर निगम ने विगत 18 जनवरी को बिल्डिंग का एक हिस्सा तोड दिया था। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नगर निगम की कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत पारित दिशा-निर्देश के विपरीत पाया था। एकलपीठ ने मनमानी कार्यवाही किये जाने पर नगर निगम आयुक्त भोपाल सुश्री संस्कृति जैन को तलब किया था। याचिका की गत दिवस 5 फरवरी को सुनवाई के दौरान नगर निगम आयुक्त भोपाल सुश्री संस्कृति जैन एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुुई। दो चरणों में सुनवाई पहले के चरण में नगर निगम आयुक्त भोपाल सुश्री संस्कृति जैन एकलपीठ के समक्ष उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामा प्रस्तुत करने की बात कही थी। दूसरे चरण में शाम साढे बजे हुई सुनवाई के दौरान हलफनामा पेष नहीं किया गया। एकलपीठ ने मौखिक माफी स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की तोड़ी गयी बिल्डिंग को बहाल करने के संबंध में जानकारी मांगी। एकलपीठ को बताया गया कि नियम अनुसार बिल्डिंग को तोडा गया है। उसे बहाल नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता की तरफ से कंपाउंडेबल आवेदन पेश किया गया था। इसके बावजूद भी उसे सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं किया गया। संबंधित प्रकरण जिला न्यायालय व हाईकोर्ट में लंबित है। पूर्व में निगमायुक्त हाईकोर्ट के समक्ष वीसी के माध्यम से उपस्थित हुई थी। इसके बावजूद भी उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत जारी की गयी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। एकलपीठ ने महिला आईएएस को अवमानना का दोषी करार देते हुए 6 फरवरी को सजा के लिए सुनवाई निर्धारित की गयी थी।
भोपाल नगर निगम की तरफ से एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गयी थी। अपील के सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ ने महिला आईएएस अधिकारी सुश्री संस्कृति ने अपीलकर्ता बनने की इजाजत प्रदान की गयी। उनकी तरफ से तर्क दिया गया कि गया कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 के सेक्शन 10 के तहत हाई कोर्ट को सिर्फ अपने आदेश या अपने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन के लिए अवमानना कार्यवाही कर सकता है। हाईकोर्ट के पास अपने से बडी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है। याचिका में याचिका में मर्लिना बिल्डकॉन प्रा लि.,शालिनी तलेजा और श्रीमति नम्रता चौधरी को अनावेदक बनाया गया था। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई करते हुए एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सुयश मोहन गुरू ने पैरवी की।
