नयी दिल्ली, 06 फरवरी (वार्ता) रेलमंत्री अश्विनी वैष्ण्व ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रेल इस समय यात्री सेवाओं पर 45 प्रतिशत की दर से करीब 60000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है और देश में रेलवे यात्री किराया बेहतर सुविधाओं के बावजूद विकसित देशों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों से भी कम है।
रेल मंत्री राज्य सभा में रेल मंत्रालय से जुड़े सवालों पर सदस्यों के अनुपूरक सवालों का जवाब दे रहे थे। उनसे एक अनुपूरक प्रश्न में पूछा गया था कि क्या रेलवे को इस समय परिचालन में जो बचत हो रही है वह वरिष्ठ नागरिकों को किराये में रियायत खत्म करने से है और क्या सरकार इस बचत के बाद वरिष्ठ नागरिकों को किराये में छूट को बहाल करने का विचार कर रही है।
श्री वैष्णव ने कहा पिछले दस साल में रेलवे के परिचालन में सुधार , किराये-भाड़े के राजस्व में बढोतरी तथा परिचालन लागत में बचत के उपायों से भारतीय रेल के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके चलते आज रेलवे अपने पूरे खर्चें खुद निपटाते हुए थोड़ा बचत की स्थिति में आ गयी है।
उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत बहाल किये जाने का कोई सीधा उत्तर देने की जगह कहा कि रेलवे को यात्री सेवाओं पर प्रत्येक 100 रुपये के खर्च पर किराये से 55 रुपये ही प्राप्त होते हैं, इस तरह यात्रियों को अब भी 45 प्रतिशत की छूट मिलती है। उन्होंने कहा कि रेलवे को इस समय जो बचत हो रही है वह मुख्य रूप से ऊर्जा की लागत में कमी ,रख रखाव की प्रक्रिया में सुधार तथा माल ढुलाई की बढ़ाेतरी का परिणाम है।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे विद्युतीकरण के चलते रेलवे को ऊर्जा (डीजल और बिजली) के खर्च में सालाना करीब 5500 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इसके अलावा रेलवे की माल ढुलाई में 40 करोड़ टन अतिरिक्त वृद्धि हुई है। रख रखाव में सुधार से भी बचत हुई है।
श्री वैष्णव ने कहा, ‘रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी निर्णय से रेलवे के ऊर्जा खर्च में काफी बचत हुई है और यह 37841 करोड़ रुपये सालाना से घट कर 32400 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया है। विद्युतीकरण का दोहरा फायदा हुआ है। एक तरफ विद्युत ट्रेनों से कार्बन उत्सर्जन में डीजल की तुलना में 95 प्रतिशत की कमी आती है , दूसरे महंगे आयातित डीजल खर्च की बचत होती है।’
रेलवे का परिचालन अनुपात घटा कर बचत बढ़ाने से जुड़े एक सवाल पर रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे का कुल परिचालन व्यय 2.75 लाख करोड़ रुपये के स्तर का है। जिसमें 1.18 लाख करोड़ रुपये कर्मचारी खर्च, 65000 करोड़ रुपये पेंशन, 32400 करोड़ रुपये ईंधन-बिजली, 2300 करोड़ रुपये कर्जों पर ब्याज, 8000 करोड़ रुपये रख रखाव का खर्च है। इन खर्चों को निकाल कर रेलवे थोड़ी बचत की स्थिति में है।
भाजपा के डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मंत्री से रेलवे का परिचालन अनुपात 98.22 प्रतिशत तक ऊंचा होने के बारे में सवाल किया था। रेलमंत्री ने कहा कि ईंधन में खर्च की कमी के बावजूद रेलवे ने 40 करोड़ टन अतिरिक्त माल की ढुलाई की है।
उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे में इस समय 12 लाख कर्मचारी और 18 लाख सेवानिवृत पेंशनधारक हैं।
