वॉशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ हाल ही में हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह समझौते पर अपनी पिछली तीखी आलोचना को थोड़ा नरम तो किया है, लेकिन एक बड़ी चेतावनी भी दे डाली है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में यूके-मॉरीशस समझौता विफल होता है या डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए कोई खतरा पैदा होता है, तो अमेरिका अपनी मौजूदगी को सुरक्षित करने के लिए सैन्य बल का प्रयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।
पिछले महीने इस डील को “बड़ी मूर्खता” बताने वाले ट्रंप ने अब माना है कि कीर स्टारमर ने तत्कालीन परिस्थितियों में सबसे व्यावहारिक विकल्प चुना था। हालांकि, उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए साफ किया कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह बेस अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि संप्रभुता या पर्यावरण के “झूठे दावों” के नाम पर अमेरिकी ऑपरेशनों को कमजोर करने की कोशिश की गई, तो वाशिंगटन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। डिएगो गार्सिया मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिकी सैन्य पकड़ बनाए रखने का प्रमुख केंद्र है, जहाँ करीब 4,000 सैन्य कर्मी तैनात हैं।
चागोस द्वीप समूह का विवाद दशकों पुराना है, जिस पर मॉरीशस लंबे समय से अपना दावा पेश करता रहा है। साल 2025 में हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत ब्रिटेन ने चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता दे दी है, लेकिन डिएगो गार्सिया बेस अगले 99 वर्षों तक ब्रिटेन-अमेरिका के नियंत्रण में ही रहेगा। ब्रिटेन इसके बदले मॉरीशस को सालाना 136 मिलियन डॉलर का किराया देगा। ट्रंप की ताज़ा धमकी ने इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के हितों पर किसी भी तरह की आंच आने पर वह सीधा सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।

