आयुष्मान भारत योजना के इनसेंटिव भुगतान को लेकर आष्टा में जांच की मांग 

आष्टा। आयुष्मान भारत योजना के तहत आष्टा में डॉक्टर्स और नर्सों को मिलने वाले इनसेंटिव घोटाले के सामने आने के बाद जिले भर में हड़कंप मच गया है. यह आष्टा का पहला मामला नहीं है जहां इस तरह से इनसेंटिव की राशि में हेराफेरी की गई है. इस मामले ने पूरे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सवालों के घेरे में ला दिया है.

आष्टा ही नहीं बल्कि जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले इनसेंटिव में गड़बड़ी होती रही हैं. आष्टा से पहले जावर का स्वास्थ्य केंद्र भी इसी तरह के मामलों से चर्चा में आया था. हालांकि बाद में मामला दबा दिया गया. यहां की जांच की जाए तो चौंकाने वाली अनेक स्थिति सामने आएंगी.

जावर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में न बिना ओटी और बिना सर्जन के करीब 2 करोड़ से ज्यादा की इनसेंटिव राशि मिलने का मामला आया था. यहां पदस्थ चिकित्सकों ने फर्जी ऑपरेशन और बड़ी बीमारियों के इलाज के नाम पर करोड़ों रुपए का इनसेंटिव लिया था. यदि वर्ष 2023 से 2025 तक के मामलों की गंभीरता से जांच की जाए तो पता चलेगा कि यह पूरा इनसेंटिव फर्जी तरीके से ऑपरेशन और अन्य तरह के उपचार को दिखाकर लिया गया था, जबकि हकीकत में यहां इतने बड़े ऑपरेशन हुए ही नहीं हैं. इस पूरे मामले की जानकारी जुटाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट भी आगे आए हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने आरटीआई के तहत जानकारी नहीं दी है.

इस पूरे मामले के खुलासे के बाद अधिकारी मामले में कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं. खुद बीएमओ ने मामले की जांच के लिए सीएमएचओ को लिखा था. विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि सीएमएचओ ने इस पूरे मामले की जांच के लिए आयुष्मान भारत के प्रांतीय कार्यालय में पत्राचार किया है, ताकि इस पूरे मामले की वरिष्ठ स्तर से जांच हो सके. यह भी चर्चा सरगर्म बनी है कि आष्टा में हुए इस मामले के साथ जावर के अस्पताल में हुए फर्जीवाड़े की जांच भी की जाएगी.

बीएमओ व अकाउंटेंट की आईडी से जारी होती है राशि

गौरतलब है कि आयुष्मान योजना में जो इनसेंटिव राशि जारी होती है वह बीएमओ और एकाउंटेंट की आईडी से जारी की जाती है. ऐसे में आष्टा में आयुष्मान इनसेंटिव राशि के घोटाले में कई और नाम सामने आ सकते हैं. यदि जांच हुई तो पता चलेगा की 2017 से लेकर वर्ष 2023 तक बीएमओ और एकाउंटेंट की आईडी से ही यह राशि जारी की गई है. ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि सिर्फ स्टोर इंचार्ज यह राशि अपने रिश्तेदारों के खातों में कैसे ट्रांसफर कर सकता है. ऐसे में इस मामले में अन्य अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है. यदि मामले की गंभीरता से जांच हो आष्टा के सरकारी अस्पताल में पदस्थ रहे अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं.

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