
जबलपुर। हाईकोर्ट में बढ़ते प्रकरणों के बोझ को कम करने के लिए याचिका को आधार कार्ड से जोड़ने सहित अन्य मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता के सुरक्षा को रजिस्ट्रार जनरल अभ्यावेदन मानकर प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखे।
जबलपुर निवासी अधिवक्ता सुरेन्द्र वर्मा की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि डिजिटलीकरण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के देश के सभी हाईकोर्ट को आदेश जारी किये थे। डिजिटलीकरण के दौरान याचिका को आधार कार्ड से जोडा जाये। कई प्रकरण में याचिकाकर्ता की मृत्यु होने के बावजूद भी याचिका लंबित रहती है। इसी प्रकार जिला न्यायालय में आपसी समझौता होने के बावजूद भी उच्च न्यायालय में दायर याचिका लंबित रहती है। जिसके कारण न्यायालय को कीमती समय बर्बाद होता है।
याचिका में कहा की गयी थी कि नेशनल प्रिज़न पोर्टल से भी हाईकोर्ट से जोड जाये। जिससे जेल में सजा काट रहे कैदियो के रिकॉर्ड को देखा जा सके। कई प्रकरण में कैदियों के सजा पूरी होने के बावजूद भी उनके द्वारा दायर की गयी अपील हाईकोर्ट में लंबित रहती है। इसके अलावा याचिका में फायलिंग व आवेदन दायर करने के संबंध में भी सुझाव दिये थे। युगलपीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दो की उचित करार देते हुए उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा।
