कोल्ड ड्रिंक के सैंपल फेल, 34 हजार यूनिट जब्त

खंडवा । गर्मी की दस्तक के साथ ही आपके बच्चों के हाथों में जो सस्ती और रंग-बिरंगी कोल्ड ड्रिंक दिखाई दे रही है, वह ठंडक नहीं बल्कि बीमारी परोस रही है। शहर के सिंधी कॉलोनी में चल रही एक कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री में बच्चों की सेहत के साथ हो रहे खिलवाड़ का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य विभाग की जांच में इस फैक्ट्री से लिए गए सभी 6 सैंपल फेल हो गए हैं। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामला न्यायालय में दर्ज करने की तैयारी कर ली है।

जांच रिपोर्ट ने उड़ाए होश: जूस के नाम पर केवल केमिकल

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सिंधी कॉलोनी, गली नंबर-5 स्थित खंडवा किराना पर छापा मारा था। यहाँ से बच्चों द्वारा बड़े चाव से पी जाने वाली कोल्ड ड्रिंक के 6 नमूने लिए गए थे। भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला से 6 जनवरी 2026 को आई फाइनल रिपोर्ट चौंकाने वाली थी जांच के लिए भेजे गए सभी 6 नमूने (मैंगो माजा, ऑरेंज माजा, बालाजी पेप्सी, लवली पेप्सी आदि) मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट में 4 नमूने अमानक पाए गए, यानी उनमें जरूरी खाद्य तत्व थे ही नहीं। वहीं, 2 नमूने मिथ्या छाप श्रेणी के मिले, जिसका अर्थ है कि पैकेट पर जो लिखा था, अंदर उससे अलग और हानिकारक सामग्री थी।

कार्रवाई के दौरान सुपरवाइजर सनी कोगे की मौजूदगी में टीम ने मौके से 34,716 यूनिट कोल्ड ड्रिंक जब्त की जिसकी बाजार कीमत करीब 62,000 रुपए आंकी गई है। आंकड़ा बताता है कि कोल्डड्रिंक्स के नाम पर मीठा जहर कितने बड़े पैमाने पर शहर की किराना दुकानों के जरिए बच्चों तक पहुँचाया जा रहा था।

प्रक्रिया पूरी, अब कोर्ट करेगा फैसला : विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, कार्रवाई 3 मार्च 2025 को हुई थी, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट 9 मार्च को आई। अब 6 जनवरी 2026 को फाइनल लैब रिपोर्ट आने के बाद यह पुष्टि हो गई है कि यह सामग्री मानव उपभोग, विशेषकर बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं थी। विभाग अब खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत संचालक के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर कर रहा है, जहाँ दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान है।

अभिभावक सावधान: 2- 5 के लालच में न फंसे :बाजार में बिकने वाली स्थानीय और सस्ती कोल्ड ड्रिंक में अक्सर फलों के रस की जगह कृत्रिम मिठास, सिंथेटिक रंग और हानिकारक एसेंस का उपयोग होता है। इससे बच्चों में पेट के रोग, दांत खराब होना, और लंबे समय में लिवर-किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है।

जिम्मेदार बोल…

बच्चों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। उक्त फर्म के सभी सैंपल जांच में फेल हुए हैं। यह गंभीर लापरवाही है। हम नियमानुसार प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत कर रहे हैं। शहर में ऐसे अन्य निर्माताओं पर भी हमारी नजर है, अमानक खाद्य पदार्थ बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

संजीव मिश्रा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खंडवा

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