
सीधी । फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में पुलिस के जांच प्रतिवेदन के अभाव में हाईकोर्ट में अवमानना प्रकरण दायर हुआ। यह मामला सीधी में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर बहेलिया परिवार के 5 लोगों की नौकरी की शिकायत का है। हाईकोर्ट के आदेश के दो वर्ष बाद भी जांच पूरी नही हो सकी।
जनपद पंचायत सीधी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रभात कुमार वर्मा द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई थी कि हरीदीन बहेलिया निवासी ग्राम रामगढ़ पोस्ट सेमरिया तहसील गोपदबनास जिला सीधी के पुत्र, पुत्री, सुपौत्र एक ही जाति के हैं। म.प्र. शासन के द्वारा जारी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग के संबंध में जारी राजपत्र के मुताबिक रीवा संभाग में बहेलिया जाति का प्रमाण पत्र किसी भी वर्ग में नहीं आता है। किन्तु शासकीय सेवा में लाभ लेने की मंशा से कूटरचित कृत्य करते हुये स्वत: तहसीलदार व उपखण्ड अधिकारी के हस्ताक्षर का प्रतिरूपण करते हुये अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र तैयार कर शासकीय सेवा में कार्य करने का लाभ लिया गया है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर मंगलेश्वर बहेलिया सहायक अध्यापक नियुक्ति दिनांक 17 जुलाई 1998, दिनेश प्रसाद पिता कामता प्रसाद बहेलिया नियुक्ति दिनांक 17 जुलाई 1998, श्रीमती कृष्णा देवी पति चिंतामणि बहेलिया नियुक्ति दिनांक 17 जुलाई 1998, राजबली पिता हरीदीन बहेलिया पदस्थापना पशु चिकित्सालय व्हीएफओ एवं हीरामणि पिता हरीदीन बहेलिया निलंबित पटवारी ने शासकीय नौकरी का लाभ लिया। शिकायतकर्ता द्वारा संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र की शिकायत पुलिस अधीक्षक सीधी से आवेदन देकर की गई। पश्चात एसडीओपी चुरहट द्वारा विधिवत जांच कर 25 फरवरी 2022 को भेजे गये पत्र में इस स्पष्ट उल्लेख किया कि उपरोक्त आरोपीगण के द्वारा सही जानकारी नहीं दी जा रही है कि उन्हें कहां से जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ।
उपरोक्त प्रकरण के संबंध में शिकायतकर्ता प्रभात कुमार वर्मा द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक डब्ल्यूपी 30758/2023 दायर किया गया। न्यायालय द्वारा उक्त याचिका प्रकरण में दिनांक 9 जनवरी 2024 को निर्देश प्रदान किये गये कि राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा मामले की जांच निर्धारित अवधि में पूरी की जाए। हैरत की बात तो यह है कि उच्च न्यायालय के पारित निर्देश के पालन में जांच पूर्ण ना होने के कारण याचिकाकर्ता द्वारा अवमानना प्रकरण दायर किया गया। पुलिस जांच प्रतिवेदन के अभाव में राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति की प्रक्रिया के अनुसार समिति द्वारा निर्णय लिया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। जब तक पुलिस जांच प्रतिवेदन सीधी से नहीं भेजा जायेगा, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती। इसी वजह से पुलिस जांच प्रतिवेदन न पहुंचे इसके लिये संबंधित आरोपियों द्वारा लम्बे अर्से से हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। जिससे उनकी नौकरी सुरक्षित रह सके।
आयुक्त जनजातीय कार्य मप्र ने एसपी को पुन: लिखा पत्र
आयुक्त जनजातीय कार्य म.प्र. द्वारा पुन: पुलिस अधीक्षक सीधी को पुलिस जांच प्रतिवेदन भेजने के लिये 16 दिसम्बर 2025 को पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित निर्देश के पालन में जांच पूर्ण न होने के कारण याचिकाकर्ता द्वारा अवमानना प्रकरण दायर किया गया है। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुये पूर्व ज्ञाप दिनांक 5 अगस्त 2019 में दिये गये निर्देशों के अनुरूप जांच कर जांच प्रतिवेदन अपने निष्कर्ष/अभिमत सहित 15 दिवस में उपलब्ध करायें। आयुक्त जनजाति कार्य म.प्र. इससे पूर्व भी पुलिस अधीक्षक सीधी को स्मरण पत्र 25.02.20, 23.07.20, 04.11.20, 27.09.21, 18.09.23, 05.03,24 को भेजे गये थे।
तहसीलदार की जांच में संदिग्ध पाए गए जाति प्रमाण पत्र
जिले के तहसीलदार रामपुर नैकिन की जांच में संबंधितों के जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध पाये गये थे। उपखण्ड अधिकारी चुरहट/रामपुर नैकिन को भेजे गये पत्र क्रमांक 144, दिनांक 28 फरवरी 2017 को कहा गया है कि पांचों दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध जांच कराकर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाय। करायी गयी जांच में मंगलेश्वर बहेलिया सहायक अध्यापक, दिनेश प्र्रसाद बहेलिया, श्रीमती कृष्णा देवी का जाति प्रमाण पत्र तहसील गोपदबनास से जारी हुआ है। वहीं राजबली एवं हीरामणि बहेलिया का जाति प्रमाण पत्र तहसील रामपुर नैकिन से जारी होने का उल्लेख है। रामपुर नैकिन से जारी दोनो जाति प्रमाण पत्रों में दायरा पंजी का क्रमांक अंकित ना होने से प्रथम दृष्टया ही संदिग्ध है।
इनका कहना है
आयुक्त जनजातीय कार्य म.प्र. के पत्र के संबंध में जानकारी लेकर जांच प्रतिवेदन भेजने की कार्यवाही की जायेगी।
संतोष कोरी, पुलिस अधीक्षक सीधी
