सतना: वैसे तो हर वर्ष प्रस्तुत होने वाले केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के मद में बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है. लेकिन इस बार शिक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 1.39 लाख करोड़ रु के प्रावधान के चलते शिक्षा को मजबूत आधार मिलेगा. वाणिज्य संकाय के प्राध्यापक डॉ. आशीष तिवारी ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह जानकारी साझा की.केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. तिवारी ने बताया कि इस बार शिक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 1.39 लाख करोड़ रु का प्रावधान किया गया है. जिससे शिक्षा का मजबूज आधार मिलेगा. इसके साथ ही सरकार ने शिक्षा-रोजगार के बेहतर समन्वय के लिए देश भर में 5 युनविर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने की घोषणा की है.
लिहाजा सीमेंट टेक्रोलॉजी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और नॉन इंजीनियरिंग से संबंधित प्रशिक्षण व रोजगार के बीच की खाईं कम होगी. जिससे एक ओर जहां कंपनियों को स्किल्ड युवा मिलेंगे वहीं युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर. इसी कड़ी में डॉ. तिवारी ने यह भी कहा कि घोषित की गई 5 युनिवर्सिटी टाउनशिप में से यदि एक भी विंध्य क्षेत्र में आ जाए तो यहां की बेरोजगारी दर काफी हद तक कम हो सकेगी. इसके साथ ही हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल निर्माण का प्रावधान भी महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित होगा. इसके अलावा डिजिटल शिक्षा, एआई और कौशल विकास पर फोकस के साथ यह बजट भविष्य उन्मुख शिक्षा की दिशा तय करता है. जिसके लिए अलग से एक ऐप लांच होने पर युवओं को काफी सहायता मिल सकेगी. वहीं खेती में एआई टेक्रोलॉजी का प्रयोग बढ़ाना किसानों के लिए भी लाभाकारी होगा.
आयुर्वेदिक एम्स सराहनीय
डॉ. तिवारी के अनुसार सरकार द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में इस बात की घोषणा की गई है कि 3 आयुवेर्दिक एम्स खोले जाएंगे. आयुर्वेद एम्स खुलने से एक ओर जहां नई नई खोज के रास्ते खुलेंगे वहीं दूसरी ओर इससे एलौपैथी का साइड इफेक्ट झेल रहे लोगों को काफी राहत मिलेगी. इस पुरानी संस्कृति से आयुर्वेद को जोडऩे का सफलतमा प्रयास माना जा सकता है.
खेल की अनदेखी
केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. तिवारी ने बताया कि पूरे बजट में खेल के विषय को महज 1-2 मिनट में ही समाप्त कर दिया गया. एक ओर जहां देश के खिलाडिय़ों से ओलंपिक-एसियाड गेम्स में मेडल जीतने की उम्म्मीद की जाती है वहीं दूसरी ओर बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान नही किया जाता. खेल की अनदेखी की वजह से नौनिकाल खिलाडिय़ों के प्रोत्साहन पर विपरीत असर पड़ेगा.
