इंदौर: शहर में यातायात जाम होना जैसे आम बात हो गई है. इसका कारण यातायात पुलिस की अनदेखी है. शहर में कही भी यातायात जाम हो, पुलिस को कुछ लेना देना नहीं है. जनता घंटों परेशान हो तो हो, हमें चालान काटने से फुरसत नहीं है. शहर की बदहाल यातायात स्थिति पर ध्यान देना हमारे यातायात पुलिस के कर्तव्य और ड्यूटी में शामिल नहीं है.इंदौर की हालत यातायात व्यवस्था को लेकर दिन-ब- दिन बिगड़ती जा रही है. शहर में अब हालात यह हो गए हैं कि किसी समय किसी भी क्षेत्र में यातायात जाम हो जाता है. आज भी यातायात पुलिस संसाधनों से पूर्ण नहीं है. डिजिटल चालान और हेलमेट को लेकर वसूली में लगे हैं, लेकिन यातायात जाम की तरफ ध्यान देना जरूरी नहीं समझा जाता है.
करीब तीन माह पहले देश में यातायात बदहाली का सर्वे आया था, जिसमें बेंगलुरु, पुणे की हालत गंभीर बताई गई थी. इंदौर का भी यातायात जाम और प्रदूषण को लेकर 10 वें स्थान पर नाम था. आज शहर में तीन महीने के बाद भी यातायात जाम होने के 27 ब्लैक स्पॉट जस के तस बने हुए हैं. इसके बावजूद प्रशासन और पुलिस यातायात को लेकर गंभीर नहीं है. शहर की जनता यातायात जाम की समस्या से रोज परेशान होती है, लेकिन नेता और अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगती है. सब मदमस्त हाथी की तरह शहर को बर्बाद करने मे लगे हैं. आज हालत यह है कि शहर की ऐसी कोई सड़क नहीं है, जहां रोज यातायात जाम नहीं होता है. इसके लिए जिम्मेदार कौन है? यातायात विभाग और प्रशासन. दोनों विभागों के बीच समन्वय नहीं है.
बेरिकेटिंग कर अस्थाई कैंपस बनाए
शहर में व्यस्त समय पर यातायात पुलिस के अधिकारी और जवान हेलमेट का बहाना बनाकर वसूली पर ध्यान से लगे रहते है. चौराहे पर लाल हरी बत्ती पर यातायात देखना और रोकना उनकी ड्यूटी में शामिल नहीं है. शहर प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस ने बेरिकेटिंग करके ऐसे अस्थाई कैंपस बना लिए है. उन बेरिकेट्स के अंदर वाहन चालक को जेल की भांति ठूंसा जा रहा है. वसूली की जा रही है.
नियमों का पालन करवाना बंद किया
सवाल है कि शहर में वाहन 20-25 की स्पीड में चल नहीं पाते. ऐसे में हेलमेट को लेकर वसूली चल रही हैं. वहीं शहर में सड़कों पर मनचाहे तरीके और यातायात का चौराहों पर नियमों का पालन करवाना बंद कर दिया गया है. वाहन चालक यातायात नियमों का पालन करना उचित नहीं समझते है, जिसकी जहां से इच्छा चला आता है. लाल पीली और हरी बत्ती का पालन करना उचित ही नहीं समझता है. शहर के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को जनता को जाम से निजात दिलाने के लिए सबसे पहले यातायात को गतिमान बनाए रखने पर कार्य योजना बनाना अनिवार्य है, ना कि हेलमेट पहनने के पालन पर
