जयपुर, (वार्ता) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को ‘मौलिक अधिकार’ घोषित करने और देशभर के विद्यालयों में नि:शुल्क सैनिटरी पैड वितरण के उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया है।
श्री गहलोत ने शुक्रवार को अपने बयान में इसे महिला सशक्तिकरण और गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हमारी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की बेटियों और महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ‘आई एम शक्ति उड़ान योजना’ शुरू की थी। इस योजना के माध्यम से राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने सभी पात्र महिलाओं और छात्राओं को नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने का साहसिक और ऐतिहासिक कदम उठाया।
उन्होंने कहा “आज न्यायालय का यह फैसला हमारी उसी प्रगतिशील सोच और विजन की जीत है। जब हमने राजस्थान में इस योजना की शुरुआत की थी, तब हमारा लक्ष्य महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों को मुख्यधारा में लाना था। अब न्यायालय के इस हस्तक्षेप से देश की करोड़ों बालिकाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा के समान अवसर प्राप्त होंगे।”
श्री गहलोत ने केन्द्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे राजस्थान की तर्ज पर इस मॉडल को अपनाएं। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों को चाहिए कि वे केवल बालिकाओं तक ही सीमित न रहकर, देश की सभी महिलाओं के लिए नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के लिए एक राष्ट्रव्यापी योजना लागू करे ताकि महिला स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक सोच में बदलाव आए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान बजट 2021-22 में प्रदेश की सभी महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन देने के लिए उड़ान योजना की घोषणा की गई थी जिसके लिए 200 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद यह योजना ठप हो गई। श्री गहलोत ने कहा कि उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय के बाद अब राजस्थान की भाजपा सरकार पहले की भांति इस योजना को संचालित करे।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय न केवल विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाएगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक ‘मील का पत्थर’ साबित होगा।
