
ब्यावरा। एक बार फिर राजगढ़ जिला शुक्रवार को प्रदेश में सबसे ठंडा जिला रहा. न्यूनतम तापमान 3 डिग्री पर जा पहुंचा. एक ही दिन में साढ़े पांच डिग्री तापमान में रिकार्ड गिरावट रही. ठंड के प्रकोप, सर्द हवाओं ने कंपकपा दिया है.
गुरुवार की देर शाम से ही ठंड ने अपना प्रकोप दिखाना शुरु कर दिया था. रात्रि को एवं शुक्रवार की तडक़े से ही शरीर को कंपकपा देने वाली ठंड का सामना करना पड़ा. जोर की ठंड के कारण सुबह-सुबह स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों, बुजुर्गो, ड्यूटी एवं कामकाज पर जाने वालों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा.
उतार-चढ़ाव के बीच 3 पर आया पारा
विगत दिवस से न्यूनतम तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है. 27 जनवरी को न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्र्री था जो 28 तारीख को बढक़र 11.6 पर जा पहुंचा. इसके बाद 29 जनवरी को न्यूनतम तापमान गिरकर 8.4 तथा 30 जनवरी को तापमान में काफी गिरावट आकर न्यूनतम तापमान सीधे 3 डिग्र्री पर जा पहुंचा.
30 जनवरी को प्रदेश के सबसे ठंडे जिले
प्रदेश में 30 जनवरी को राजगढ़ जिले में सबसे कम न्यूनतम तापमान 3 डिग्री रहा. इसके बाद मंदसौर जिले में 4.2 डिगी, गिरवर (शाजापुर) में 5.6, करौंदी (कटनी) में 6.2 तथा मरुखेड़ा ( नीमच) मेें न्यूनतम तापमान 7 डिग्री रहा. मौसम केन्द्र भोपाल के अनुसार आगामी दिवस में जिले में शीत लहर चलने के संकेत दिए गये है.
ठंड का प्रकोप सहन नहीं कर पा रहे बेसहारा गौवंश
ठंड के बढ़े प्रकोप ने एक बार फिर बेसहारा गौवंश पर संकट खड़ा कर दिया है. कड़ाके की ठंड बेसहारा गौवंश की मौत का कारण बन रही है. आये दिन गौवंश ठंड के प्रकोप से जूझते हुए दम तोड़ रहे है. ठंड के प्रकोप का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चौराहों, सडक़ों पर जलने वाले अलाव के आसपास गौवंश आकर खड़े हो जाते है ताकि ठंड से राहत मिल सके. विशेषकर खुले आसमान के नीचे रहने वाले बेसहारा गौवंश के लिए कड़ाके ठंड मुसीबत बनी हुई है. गौवंश बीमार या फिर अत्यधिक कमजोर अवस्था में होते है उन पर कड़ाके की ठंड का प्रभाव कहीं अधिक होता है. शीत लहर के साथ ठंड का जोर बीमार एवं कमजोर गौवंश के लिए जानलेवा साबित होता है. उल्लेखनीय है कि नगर सहित जिले भर में एक लाख से अधिक बेसहारा गौवंश खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है.
