हैदराबाद, 29 जनवरी (वार्ता) देश के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत करने और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए भारतीय विमान सेवा कंपनियां अगले 10 साल में साइबर सुरक्षा और डिजिटलीकरण पर करीब एक अरब डॉलर खर्च करेंगी।
फ्रांस की विमान बनाने वाली कंपनी एयरबस ने यहां विंग्स इंडिया 2026 में एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी।
एयरबस इंडिया और साउथ एशिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जर्गेन वेस्टरमायर ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि अगले एक दशक में भारत का वाणिज्यिक विमान बेड़ा तीन गुना बढ़कर 2,250 विमानों तक पहुंच जायेगा। साल 2035 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक विमानन बाजार बन जायेगा।
उन्होंने कहा, “हम वैश्विक विमानन का केंद्र पूर्व की ओर स्थानांतरित होते देख रहे हैं। भारत का बेड़ा विस्तार न केवल घरेलू गतिशीलता को बढ़ायेगा, बल्कि देश को अंतर्राष्ट्रीय ट्रांजिट के लिए एक प्रमुख हब के रूप में स्थापित करेगा। इसलिए भारतीय विमानन के अगले चरण में यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके परिचालन मॉडल भी बेड़े और नेटवर्क के विस्तार की गति के साथ विकसित हों।”
उन्होंने कहा कि एयरबस घरेलू विस्तार के लिए ए320 परिवार और देश की मध्यम से लंबी दूरी की अंतर्राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं का नेतृत्व करने के लिए ए321एक्सएलआर और ए350 के साथ इस विकास का समर्थन करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है।
एयरबस ने बताया कि भारतीय विमान सेवा कंपनियों से यह भी अपेक्षा है कि वे साल 2035 तक उड़ान, जमीनी और तकनीकी परिचालनों के डिजिटलीकरण के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और विमान कनेक्टिविटी पर एक अरब डॉलर तक खर्च करेंगी।
कंपनी ने कहा है कि साल 2025 की तुलना में 100 से अधिक सीटों वाले विमानों की संख्या में तीन गुना वृद्धि वैश्विक विमानन इतिहास के सबसे आक्रामक विस्तारों में से एक है। विमानों की मांग जी20 देशों में सबसे तेज आर्थिक वृद्धि, बुनियादी ढांचे पर बढ़ते सरकारी निवेश और भारतीय उपभोक्ता व्यवहार में मूलभूत बदलाव के अनूठे संयोजन से प्रेरित होगी। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति हवाई यात्रा अगले दशक में 0.13 से बढ़कर 0.29 होने की संभावना है।
उसने बताया कि इस विस्तारित बेड़े के लिए 2035 तक पायलटों की आवश्यकता 35,000 तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वर्तमान 12,000 से काफी अधिक है। वहीं, तकनीकी कार्यबल को भी बढ़ाकर 34,000 करना होगा, जो मौजूदा 11,000 की संख्या से तीन गुना है। बेड़ा विस्तार के साथ भारत तेजी से मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) का एक प्रमुख केंद्र बनने की ओर बढ़ेगा। एयरफ्रेम, इंजन और कंपोनेंट्स का बाजार 2035 तक बढ़कर 9.5 अरब डॉलर का होने की उम्मीद है।
