इंदौर: आखिर क्रिश्चियन कॉलेज प्रबंधन को हाईकोर्ट से से मिल गया. अगली सुनवाई डेढ़ माह बाद होगी. कोर्ट में स्टे का आधार अपर आयुक्त कोर्ट में लगी याचिका को बनाया गया है. राजस्व अपर आयुक्त कोर्ट के आदेश में प्रति परीक्षण याचिका की सुनवाई 3 फरवरी नियत कर यथा स्थिति के आदेश थे, जिसको तथ्यहीन करार दिया था.क्रिश्चियन कॉलेज की 400 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की जमीन सरकारी घोषित करने के खिलाफ हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया है.
उक्त मामले में आज हाईकोर्ट में जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई के लिए कॉलेज प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया द्वारा याचिका दायर की गई थी. याचिका में कलेक्टर के आदेश को गलत बताते हुए कहा कि धारा 181 और 182 में सुनने का अधिकार नहीं है. मध्यप्रदेश राजस्व अधिनियम 1959 में राजस्व न्यायालय का मामला है. कलेक्टर के आदेश के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने 19 जनवरी को राजस्व अपर आयुक्त की कोर्ट में प्रति परीक्षण याचिका दायर की थी, कलेक्टर कोर्ट ने इसके पहले प्रतिपरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी. इसके बाद 12 जनवरी को कलेक्टर आदेश दे दिया, जबकि 23 जनवरी को उक्त मामले में कलेक्टर के यहां तारीख थी.
अपर आयुक्त राजस्व कोर्ट ने 26 दिसंबर को ही उक्त जमीन मामले में स्थगन दे दिया और फिर 7 जनवरी को कलेक्टर आदेश के खिलाफ यथास्थिति बनाए रखते हुए 3 फरवरी सुनवाई तारीख दी. मतलब स्टे बरकरार था. मामले में खास बात यह है कि 23 जनवरी की तारीख सुनवाई के पहले ही कलेक्टर ने 12 जनवरी को सरकारी जमीन घोषित करने के आदेश दे दिए थे. हाईकोर्ट जस्टिस प्रणय वर्मा ने याचिकाकर्ता क्रिश्चियन कॉलेज प्रबंधन के अधिवक्ता अजय बागड़िया के तर्को से सहमत होकर स्टे दे दिया. अब उक्त मामले में अगली सुनवाई डेढ़ माह बाद होगी
