दिखावे और अहंकार की नहीं पारदर्शी आर्थिक नीति पर चले सरकार : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (वार्ता) कांग्रेस ने सरकार से दिखावे और अहंकार की जगह पारदर्शिता वाली नीति पर चलने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसकी आर्थिक नीतियां असमानता को बढ़ाने वाली हैं जो देश को मध्यम आय के ऐसे जाल में धकेल रही हैं जहां समावेशी विकास की जगह कुछ लोगों का एकतरफा लाभ प्रभावी होता है।

कांग्रेस शोध विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राजीव गौड़ा ने देश की आर्थिक स्थिति पर ‘बढ़ती असमानता सिमटता जनकल्याण’ नाम से एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है जिसमें केंद्र सरकार की आर्थिक तस्वीर पर गहरे सवाल उठाए गये हैं। इसमें सरकार से आग्रह किया गया है कि उसे पारदर्शी आर्थिक नीति अपनाते हुए निष्पक्ष आलोचनाओं को सुनना चाहिए और इन आलोचनाओं में जहां और जैसे भी असहज तथ्य सामने आते हैं, उनको स्वीकार करना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि और दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की उच्च विकास दर जमीनी हकीकत से पूरी तरह मेल नहीं खाती। पिछले एक दशक की नीतियों ने ‘क्रोनी’ पूंजीवाद को बढ़ावा दिया है जिससे अर्थव्यवस्था ‘के’आकार की हो गई है। इसमें एक छोटा अमीर वर्ग भारी लाभ उठा रहा है जबकि बहुसंख्यक आबादी बेरोजगारी, गरीबी और संघर्ष में फंसी हुई है। सात प्रतिशत से ज्यादा जीडीपी वृद्धि के बावजूद लाखों नये रोजगार नहीं बने और जो रोजगार सृजित हुए हैं वे ज्यादातर गिग इकॉनामी और असंगठित क्षेत्र में हैं, जहां मजदूरों को न्यूनतम सुरक्षा और वेतन भी नहीं मिल रहा है।

पार्टी ने कहा है कि कोविड के बाद शहरों से लौटे मजदूर निर्माण क्षेत्र में नौकरियां न मिलने पर अर्धरोजगार और कम उत्पादक खेती में फंस गए हैं। सरकार ने मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजना को कमजोर कर, शिक्षा-स्वास्थ्य बजट में कटौती की और निजीकरण पर जोर देते हुए जनकल्याण पर सीधा हमला किया है। पार्टी ने इंदौर में जल संकट जैसी घटनाओं को बुनियादी सेवाओं में निवेश की कमी का सबूत करार दिया है।

कांग्रेस ने मांग की है कि दिखावे और अहंकार को छोड़कर सरकार को पारदर्शिता अपनाते हुए निष्पक्ष आलोचनाओं को सुनते हुए असहज तथ्यों को स्वीकार करना चाहिए। पार्टी का कहना है कि वर्तमान नीतियां बढ़ती असमानता को और गहरा रही हैं और भारत को मध्यम आय वाले जाल में धकेल रही हैं, जहां समावेशी विकास की जगह कुछ लोगों का एकतरफा लाभ हावी हो रहा है। रिपोर्ट का मकसद सरकार को उपेक्षित वर्गों और अधूरे कामों की याद दिलाना है।

इस बीच कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस शोध विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राजीव गौड़ा के नेतृत्व में तैयार वार्षिक रिपोर्ट पर कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों को सही ढंग से चिन्हित करती है, जो ‘के-आकार की’ असमान वृद्धि, अपर्याप्त और निम्न-गुणवत्ता वाले रोज़गार सृजन, सामाजिक सुरक्षा जाल के क्षरण और स्वच्छ हवा, पानी तथा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं में कम निवेश से उत्पन्न हो रही हैं। यह सभी नीति-निर्माताओं, आर्थिक विश्लेषकों और जागरूक नागरिकों के लिए एक अनिवार्य पठनीय रिपोर्ट है।

पार्टी ने उम्मीद जताई कि सरकार आगामी आर्थिक सर्वेक्षण और केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री और मुख्य आर्थिक सलाहकार इस रिपोर्ट में प्रस्तुत की गई वास्तविकताओं पर ध्यान देगी।

 

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