कारोबारियों को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने किया सीजीटीएमएसई से समझौता

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में दिल्ली सरकार और सीजीटीएमएसई क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइसेस (सीजीटीएमएसई) के बीच मंगलवार को दिल्ली क्रेडिट गारंटी स्कीम के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। श्रीमती गुप्ता ने कहा कि यह कदम न केवल उद्यमियों के लिए पूंजी की राह आसान बनाता है, बल्कि बैंकों के जोखिम को भी कम करेगा, जिससे वे बिना किसी डर के छोटे व्यवसायों को ऋण दे सकें। उन्होंने कहा कि इस पहल से दिल्ली के व्यापारिक माहौल में सुधार होगा, जिससे नए रोजगार पैदा होंगे, नए आइडियाज को बढ़ावा मिलेगा और शहर की अर्थव्यवस्था को सभी वर्गों के लिए समावेशी बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने योजना की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि दिल्ली क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत कर्ज की पूरी जिम्मेदारी सरकार और संस्था मिलकर उठाएंगे। जब कोई उद्यमी लोन लेगा तो उसका 75 से 90 प्रतिशत हिस्सा सीजीटीएमएसई कवर करेगा, जबकि बचा हुआ 5 से 20 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली सरकार अपनी तरफ से सुरक्षित करेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि बैंक द्वारा दिए गए लोन की 95 प्रतिशत गारंटी सरकार की होगी, जिससे बैंकों का जोखिम घटकर सिर्फ 5 प्रतिशत रह जाएगा और वे बिना किसी हिचकिचाहट के छोटे कारोबारियों को पैसा दे सकेंगे।

उन्होंने इस योजना के व्यापक असर को समझाते हुए बताया कि इसमें मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, रिटेल, शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान सहित विभिन्न क्षेत्र के बिजनेस शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 50 करोड़ रुपये का खास फंड बनाया है। इस छोटे से फंड की ताकत इतनी ज्यादा है कि इसके जरिए बैंक करीब 2,500 करोड़ रुपये तक के लोन बांट सकेंगे। जरूरत पड़ने पर आगे चलकर इस कोष की राशि बढ़ाई भी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना में 50 गुना लीवरेज रखा गया है यानी 2 करोड़ रुपये के निवेश से 100 करोड़ रुपये तक का ऋण संभव होगा। साथ ही, 10 प्रतिशत की एनपीए सीमा तय की गई है, ताकि सरकार पर वित्तीय जोखिम सीमित बना रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने शुरुआत में एक लाख लोगों तक इस मदद को पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन सीजीटीएमएसई ने यह साफ कर दिया है कि लाभार्थियों की संख्या को लेकर कोई पाबंदी या ऊपरी सीमा नहीं है। दिल्ली का जो भी छोटा कारोबारी इस योजना की शर्तों को पूरा करेगा, उसे दिल्ली सरकार की गारंटी पर लोन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीजीटीएमएसई और दिल्ली सरकार का यह सहयोग दिल्ली को समावेशी आर्थिक विकास में आगे ले जाने का बड़ा अवसर है। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब दिल्ली विकसित होगी और यह योजना उसी दिशा में मजबूत नींव रखेगी।

दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पहल को दिल्ली के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना दिल्ली के लगभग 10 लाख एमएसएमई और विशेष रूप से 2 लाख से अधिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए बड़ा संरचनात्मक सुधार है। उन्होंने कहा कि बैंकों के पुराने तौर-तरीकों, जैसे ढेर सारे कागजात, अपनी संपत्ति के कागजात जमा करना और गारंटी (कोलेटरल) की शर्तों की वजह से छोटे कारोबारियों खासकर महिलाओं के लिए लोन लेना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। इसी बाधा को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

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