
भोपाल। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 56वीं वार्षिक बैठक से मध्यप्रदेश ने वैश्विक निवेश मानचित्र पर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है। दावोस में हुई बैठकों, राउंडटेबल संवादों और समझौतों के जरिए राज्य ने खुद को एक भरोसेमंद, नीति-स्थिर और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका सीधा असर आने वाले समय में उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास पर दिखने की उम्मीद है।
19 से 23 जनवरी तक आयोजित इस वैश्विक मंच पर 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए। भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक मूल्यों और तेज आर्थिक विकास का संदेश दिया, वहीं मध्यप्रदेश ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में निवेश और क्रियान्वयन क्षमता के दम पर निवेशकों का भरोसा जीता।
निवेश और आर्थिक प्रभाव पर फोकस:
मध्यप्रदेश की सहभागिता का मुख्य केंद्र निवेश और उसके आर्थिक प्रभाव रहे। राज्य ने यह स्पष्ट किया कि वह केवल निवेश प्रस्ताव आमंत्रित नहीं करता, बल्कि योजनाबद्ध क्रियान्वयन, समयबद्ध स्वीकृतियों और पोस्ट-इन्वेस्टमेंट सपोर्ट के जरिए निवेशकों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी निभाता है।
मैन्युफैक्चरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो व ईवी कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, फार्मा, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश की तैयारियों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। औद्योगिक पार्क, प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, सिंगल विंडो सिस्टम और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को निवेश के प्रमुख आकर्षण के रूप में सामने रखा गया।
वैश्विक कंपनियों से निवेश संवाद
दावोस में राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने रिन्यू पावर, ग्रीनको, अमारा राजा, जीएमआर, डीपी वर्ल्ड, गूगल, एचसीएल, टेक महिंद्रा, एनवीडिया, पेप्सिको और अपोलो हॉस्पिटल्स सहित कई वैश्विक और भारतीय कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व के साथ संवाद किया। इन बैठकों में ग्रीन एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और एग्री-वैल्यू चेन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले। मुरैना सोलर-कम-स्टोरेज परियोजना को देश में किफायती विद्युत टैरिफ का उदाहरण बताते हुए इसकी सराहना भी की गई।
लॉजिस्टिक्स और एग्री-इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती:
दावोस यात्रा के दौरान डीपी वर्ल्ड और मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बीच पवारखेड़ा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स एवं फूड पार्क परियोजना के लिए कंसेशन एग्रीमेंट किया गया। यह परियोजना राज्य में आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब के विकास, कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन मजबूत करने और एग्री-प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी।
रोजगार और विकास की नई संभावनाएं:
निवेश संवादों और समझौतों से यह संकेत मिला है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, आईटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में होने वाला निवेश राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला साबित हो सकता है। इस प्रकार दावोस में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी ने यह साफ कर दिया है कि राज्य अब केवल संभावनाओं की बात नहीं करता, बल्कि निवेश को जमीन पर उतारने की क्षमता रखता है। वैश्विक मंच से मिला निवेशकों का भरोसा मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
