
सीहोर। शनिवार को एक बार फिर से मौसम का मिजाज बदल गया. सुबह से ही घने बादलों के साथ दिन भर 11 किमी तक की रफ्तार से सर्द हवा चली. ऐसे में लोग दिन में भी गर्म कपड़े पहनने को मजबूर हो गए. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में बूंदाबांदी की संभावना जताई है.
वहीं बार-बार मौसम के मिजाज बदलने का असर लोगों की सेहत पर भी साफ दिखने लगा है. पिछले दिनों सुबह और रात में तेज ठंडक और दिन में तेज धूप के कारण इस बार वायरल फीवर का नेचर बदल गया है. इसी बदलाव के चलते अस्पतालों में आने वाले मरीजों में नए लक्षण देखने को मिल रहे हैं. जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 15 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिन्हें बुखार के साथ मुंह में छाले की समस्या हो रही है. डॉक्टरों का मानना है कि इस मौसम में वायरल जनित इम्यूनोजेनिक रिएक्शन बढ़ गया है. जिससे मरीजों के मुंह, होंठ और जीभ पर छाले बन रहे हैं. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर वायरस फिर से सक्रिय हो जाता है. ऐसे मरीजों को बुखार, थकान और कभी-कभी दस्त जैसी समस्या भी देखने को मिल रही है. इन छालों का ठीक होने में लगभग 5 से 7 दिन का समय लगता है. पिछले कई दिनों दिन-रात के तापमान में भारी अंतर के कारण शरीर तेजी से मौसम के अनुरूप ढाल नहीं पा रहा। मरीज दिन में गर्मी देखकर गर्म कपड़े उतार लेते हैं और रात में ठंड से ठिठुरते हैं. यही लापरवाही वायरस को शरीर पर ज्यादा असर डालने का मौका देती है. अचानक बादलों के कारण अब फसलों पर कीट प्रकोप बढ़ेगा. चना में इल्ली और गेहूं में जड़माऊ का प्रकोप बढ़ेगा. इसके साथ ही जिन फसलों में फूल आ रहे हैं उनके फूल भी गिरने की संभावना बढ़ जाती है. सब्जी वाली फसलों पर भी मौसम का असर दिखाई देगा.
गुनगुने पानी का करें अत्यधिक सेवन, ठंडे से परहेज
जिला अस्पताल के एमडी डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि इस मौसम में अत्यधिक ठंडी और तीखी चीजों का सेवन न करें. कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम या मसालेदार खाना मुंह के छालों और वायरल फीवर को और गंभीर बना सकता है. बुखार या छाले होने पर घरेलू इलाज पर भरोसा न करें और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें. गुनगुना पानी पिएं, संतुलित आहार लें और पर्याप्त आराम करें.
