
उज्जैन। महाकाल देश का पहला ऐसा मंदिर होगा जहां एक ही स्थान पर श्रद्धालुओं को एक-दो नहीं बल्कि 10 तरह के कमल के फूल खिलखिलाते हुए नजर आएंगे। इनमें से कई कमल तो ऐसे हैं जो आम जगहों पर नहीं दिखाई देते ये बहुत दुर्लभ माने जाते हैं। महाकाल लोक में यह कमल नजर आएंगे। कमल के लिए बीज लगा दिए गए है और ऐसा माना जा रहा है कि 70 दिन में एक हजार पंखुडिय़ों के साथ ये 10 प्रकार के कमल के फूल पूरी तरह से खिल जाएंगे। कमल के फूल विशेषज्ञ इसके लिए विशेष रूप से महाकाल लोक परिसर में पहुंचे थे और उन्होंने उचित स्थान पर पानी के साथ कमल बीज रोपे है। विशेषज्ञ प्रमोद गायकवाड़ ने बताया है कि करीब 150 दिनों तक यह फूल खिले रहेंगे। इस अवसर पर महाकाल मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचन्द जूनवाल भी मौजूद रहे।
पानी में मछलियां भी छोड़ीं, 17 तरह के वाटर लिली भी लगाए
फूल लगाने आए विशेषज्ञ गायकवाड़ ने ही यह भी जानकारी दी कि महाकाल मंदिर देश का पहला ज्योतिर्लिंग होगा, जहां इस प्रकार के 10 दुर्लभ प्रजातियों के कमल के फूल खिलते नजर आएंगे। इस जगह पर उन्होंने पानी में गप्पी और मौली मछलियां छोड़ी हैं, जिससे पानी हमेशा साफ रहेगा। कमल के अलावा उन्होंने 17 प्रजातियों की वाटर लिली भी लगाई है। जिससे मंदिर व महाकाल लोक के सौंदर्यीकरण और अधिक बढ़ जाएगा। वहीं लोंग कांचा कमल सफेद रंग का रहेगा, ड्रॉप ब्लड सूर्ख लाल रंग का, विष्णु कमल ऑफ व्हाइट, लक्ष्मी कमल देसी प्रजाति का है। अष्ट दल आठ पंखुडिय़ां वाला, कावेरी 850 पंखुडिय़ां वाला, रेड पियोनी लाल रंग का 900 पंखुडिय़ां वाला, ग्रीन एप्पल कच्चा सेवफल की तरह दिखने वाला, पिंक क्लाउड गुलाबी रंग का 450 पंखुडिय़ां वाला होगा।
