
ग्वालियर। थैलेसीमिया रोग से पीड़ित समाज के अभावग्रस्त दो बच्चों को ठीक कराने की जिम्मेदारी रक्त अर्पण सेवा समिति ने ली है। इन दोनों बच्चों का निःशुल्क बोन मैच करवाया गया। कैम्प में पता लगा कि इनके भाई बहन और इनका बोन मैरो मैच हो गया है।उसके बाद इलाज का खर्चा 20 लाख आने पर रक्त अर्पण सेवा समिति ने जिम्मेदारी ली। कोल इंडिया, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री राहत कोष से 15 लाख की राशि स्वीकृत करवाई गई तो रक्त अर्पण सेवा समिति के सभी साथियों ने 1 लाख रुपये इकट्ठे करके चेक पहुँचाया। इन बच्चों के परिजनों एवं समाजसेवी संगठनों ने रक्त अर्पण सेवा समिति और राजीव गांधी अस्पताल दिल्ली के डॉ. दिनेश भुराणी एवं उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया है जिन्होंने ग्वालियर के इन थैलेसेमिया पीड़ितों को नया जीवन प्रदान किया।
रक्त अर्पण सेवा समिति का कहना है कि सच्चा सुकून धन दौलत या पद प्रतिष्ठा कमाकर नहीं मिलता बल्कि तब मिलता है जब कोई गरीब असहाय रोगी आपके प्रयासों और थोड़े से आर्थिक सहयोग से स्वस्थ होकर आपके पास आता है और हलकी सी मुस्कान लिए बस इतना कह देता है कि मैं पहले से ठीक हूँ।इन दोनो बच्चों को पहले हर 15 दिन में जिंदा रहने के लिए ब्लड चढ़वाना पड़ता था। माता पिता को हर 15 दिन में अस्पताल जाकर ब्लड की व्यवस्था करनी पड़ती थी लेकिन जब इन बच्चों को ठीक कराने की जिम्मेदारी रक्त अर्पण सेवा समिति ने ली तो मुश्किलें आसान हो गईं।
