
जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य शासन व नगर पालिकाओं को प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रो प्लास्टिक से निपटने के लिए व्यापक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को नियत की है। मामला स्वत: संज्ञान आधारित सुनवाई से संबंधित है। एनजीटी ने निर्देशित किया है कि राज्य और जिला स्तर की समितियां प्लास्टिक कचरा और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी करें। साथ ही चार सप्ताह के भीतर पर्यावरण सचिव को कार्रवाई की रिपोर्ट जमा करें। राज्य शासन कलेक्टरों को निर्देशित करें। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और क्षेत्रीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और उज्जैन नगर निगम इस सिलसिले में समुचित गंभीरता का परिचय दें।
एनजीटी ने स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्लास्टिक और माइक्रो प्लास्टिक के खतरे को गंभीरता से लिया। एनजीटी ने पाया कि अकेले भोपाल में 50 से अधिक अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिटें लगभग दो लाख नागरिकों के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर रही हैं। जिस पर माइक्रो प्लास्टिक हटाने की तकनीकों का मूल्यांकन होना चाहिए। वर्तमान तकनीकों का भी परीक्षण और मूल्यांकन आवश्यक है। वायु, जल और मिट्टी से माइक्रो प्लास्टिक हटाने के लिए नई तकनीकों का विकास होना चाहिए। वस्त्र, टायर, डिटर्जेंट, सडक़ सतह और अन्य उत्पादों के टिकाऊ डिजाइन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। व्यक्तिगत देखभाल और कास्मेटिक उत्पादों में माइक्रो प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया चाहिए। प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन से पर्यावरण में रिसाव कम करने की दिशा में प्रयासों को गति दी जानी चाहिए। बायो डिग्रेडेबल प्लास्टिक और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना भी एक उपाय है। नदियों, वेटलैंड और समुद्र तटों की सफाई पर ध्यान आवश्यक है। सीवेज और वर्षा जल प्रणालियों में फिल्टर-स्क्रीन लगाई जानी चाहिए। साथ ही नगर पालिका जल आपूर्ति और वेटलैंड में माइक्रो प्लास्टिक की निगरानी वर्ष में दो बार करें।
