
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में गुरूवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक के बाद एक सेना के कई घायल जवानों को एंबुलेंस के माध्यम से मेडिकल लाया गया। मिलेट्री क्षेत्र से लेकर मेडिकल तक पूरे मार्ग को ग्रीन कॉरिडोर में तब्दील किया गया। इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा और मार्ग पर आमजनों की आवाजाही पर कुछ देर के लिए रोक लगा दी गई। मेडिकल में अचालक ऐसा माहौल देखकर वहां भर्ती मरीजों के परिजनों कुछ देर के लिए सकते में आए।
लेकिन कुछ देर बाद उन्हें पता चल गया कि सेना के नेतृत्व में मेडिकल इमरजेंसी को लेकर ये सब कुछ एक मॉकड्रिल के तहत कराया गया है। इस मॉकड्रिल का उद्देश्य किसी भी आपदा, आतंकी घटना या युद्ध जैसी स्थिति में घायलों के त्वरित उपचार, समन्वय और व्यवस्थाओं की जांच करना था। मॉकड्रिल के दौरान यह परखा गया कि सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, सेना और मेडिकल स्टाफ किस तरह से तालमेल बनाकर काम करता है। जानकारी के अनुसार ब्लास्ट डिजास्टर के दौरान घायल सेना के जवानों को समय पर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से भी मॉकड्रिल पूरी की गई।
घर पहुंचे डॉक्टर्स को बुलाया वापस
मॉकड्रिल के दौरान मेडिकल में जैसे ही सेना के कई जवानों को घायल अवस्था में इलाज के लिए लाया गया वैसे ही अपनी ड्यूटी पूरी कर घर पहुंच चुके डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों को मेडिकल अस्पताल प्रबंधन द्वारा तत्काल वापस बुलाया गया। इमरजेंसी वार्ड, ट्रॉमा सेंटर और ऑपरेशन थिएटर को अलर्ट मोड पर रखा गया। कुछ ही समय में पूरा मेडिकल अमला इलाज की तैयारियों में जुट गया। घायल जवानों को स्ट्रेचर पर लाकर तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया और उनकी स्थिति के अनुसार आगे की चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की गई।
मेडिकल का पूरा स्टाफ रहा सक्रिय
मेडिकल अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने नवभारत को बताया कि मेडिकल के सारे विभाग के डॉक्टर्स, कर्मचारियों का समूह इमरजेंसी मॉकड्रिल में सक्रिय रहा। सेना के नेतृत्व में पूरी मॉकड्रिल करीब दो घंटे तक चली। मॉकड्रिल के सफल समापन के बाद अस्पताल परिसर में स्थिति सामान्य हुई। आम लोगों को भी यह संदेश दिया गया कि घबराने की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि यह अभ्यास भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने की तैयारी का हिस्सा था। आपात सूचना मिलते ही अस्पताल के सभी प्रमुख विभाग सक्रिय कर दिए गए। ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी, ओटी के साथ-साथ ब्लड बैंक और जांच इकाइयों को भी अलर्ट रखा गया, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।
