
नोएडा। सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की दर्दनाक मौत के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस ने दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया है, जबकि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने निर्माण स्थल पर गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि की है। इस बीच राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी हादसे का स्वतः संज्ञान लेते हुए नोएडा प्राधिकरण और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।
बताया गया कि 16-17 जनवरी की रात घने कोहरे के बीच युवराज की एसयूवी बिना बैरिकेड और चेतावनी संकेत वाले, 20-30 फुट गहरे पानी से भरे निर्माण गड्ढे में गिर गई थी। मौके पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न होने और जलभराव के कारण वह बाहर नहीं निकल सके। रेस्क्यू में देरी हुई और करीब चार घंटे बाद शव निकाला गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने और कार्डियक अरेस्ट से मौत की पुष्टि हुई है।
जांच में सामने आया है कि संबंधित निर्माण स्थल लंबे समय से परित्यक्त अवस्था में था, जहां न तो बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर या लाइटिंग। पुलिस ने पहले ही बिल्डर कंपनी के सीईओ को गिरफ्तार किया था, अब पर्यावरण और प्रदूषण कानूनों के उल्लंघन सहित अन्य धाराओं में नई एफआईआर भी दर्ज की गई है।
NGT ने निर्माण गड्ढों में जलभराव, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी को हटाया गया है और एक इंजीनियर को निलंबित किया गया है।
युवराज के परिवार ने इस हादसे को प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम फेल्योर करार देते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-150 सहित आसपास के इलाकों में ऐसे कई खुले और पानी-भरे गड्ढे ‘डेथ ट्रैप’ बने हुए हैं, जिन पर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए।
पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जिम्मेदार सभी व्यक्तियों व संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी।
