भारत और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्ते अब केवल कूटनीतिक शिष्टाचार या पारंपरिक मित्रता तक सीमित नहीं रहे हैं. यह साझेदारी तेजी से रणनीतिक आर्थिक गठजोड़ में बदल चुकी है. हालिया उच्च स्तरीय बैठकों और समझौतों ने साफ कर दिया है कि भारत और यूएई के व्यापारिक संबंध अपने स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुके हैं.मई 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते ने दोनों देशों के बीच व्यापार की दिशा और गति दोनों बदल दीं थी. जहां 2020-21 में भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार लगभग 43.3 बिलियन डॉलर का था, वहीं 2024-25 तक यह आंकड़ा 100 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया. यह केवल संयोग नहीं, बल्कि योजनाबद्ध नीतिगत फैसलों का परिणाम है. इस समझौते के तहत भारतीय रत्न और आभूषण, कपड़ा, कृषि उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान को यूएई के बाजार में रियायती या शून्य शुल्क पर प्रवेश मिला. इससे भारतीय निर्यातकों को नया भरोसा और नया बाजार दोनों मिले.19 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की बैठक ने इस साझेदारी को और ऊंचा लक्ष्य दिया. दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी संकल्प लिया. यह लक्ष्य केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस रणनीति दिखाई देती है. भारत मार्ट, वर्चुअल व्यापार गलियारा और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोडऩे जैसे प्रोजेक्ट्स इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं.राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की हाल ही की भारत यात्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक सहयोग अब ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और बुनियादी ढांचे तक फैल चुका है. ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस के बीच हुआ तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति समझौता भारत की दीर्घकालिक जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम है. 2026 से अगले 10 वर्षों तक सालाना 0.5 मिलियन टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भारत की ऊर्जा रणनीति को मजबूती देगी.रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर हुए आशय पत्र दोनों देशों के बीच भरोसे की गहराई को दर्शाते हैं. यह साझेदारी केवल हथियार खरीद या तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त विकास और वाणिज्यिक अवसरों की ओर बढ़ रही है. गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में यूएई की संभावित भागीदारी भी इसी सोच का हिस्सा है. एयरपोर्ट, पोर्ट और स्मार्ट टाउनशिप जैसे प्रोजेक्ट भारत के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं. नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की सहमति यह संकेत देती है कि भारत और यूएई अब दीर्घकालिक और संवेदनशील क्षेत्रों में भी एक-दूसरे पर भरोसा करने को तैयार हैं. पिछले दस वर्षों में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की यह पांचवीं भारत यात्रा है. यह आवृत्ति अपने आप में इस रिश्ते की गंभीरता और प्राथमिकता को दर्शाती है.आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से गुजर रही है, भारत और यूएई की यह साझेदारी स्थिरता, भरोसे और साझा विकास का मॉडल बनकर उभर रही है. यदि घोषित लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह गठजोड़ न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि व्यापक एशिया और खाड़ी क्षेत्र के आर्थिक संतुलन के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है.
