नई दिल्ली | 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को सुरक्षित संपन्न कराने के लिए नई दिल्ली को एक अभेद्य ‘डिजिटल किले’ में तब्दील कर दिया गया है। खालिस्तानी और विदेशी आतंकी समूहों से मिले खतरों के इनपुट के बीच, इस बार सुरक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। कर्तव्य पथ पर तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष ‘स्मार्ट चश्मे’ दिए गए हैं, जो संदिग्धों के चेहरे पहचानते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देंगे। परेड रूट पर 1,000 हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं, जो अत्याधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) से जुड़े हैं। पूरे रूट को 26 जोन में बांटा गया है, जिसकी कमान डीसीपी स्तर के अधिकारी संभाल रहे हैं।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर देवेश महला के अनुसार, जमीन से लेकर आसमान तक दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मुस्तैद हैं। फिजिकल सुरक्षा के लिए 10,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात की गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के लिए तीन लेयर की सघन चेकिंग अनिवार्य की गई है। हवाई हमलों और अवैध ड्रोन से निपटने के लिए ‘एंटी-ड्रोन यूनिट्स’ को सक्रिय किया गया है, जबकि ऊँची इमारतों पर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (NSG) के स्नाइपर्स की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पूरी दिल्ली में होटलों और किरायेदारों के सत्यापन का सघन अभियान भी जारी है।
इस वर्ष मेहमानों की सुविधा के लिए एन्क्लोजर के नाम भारतीय नदियों (जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा) के नाम पर रखे गए हैं। अतिथियों को मेट्रो में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है, जिसके लिए वे डिजिटल पास का उपयोग कर सकेंगे। सुरक्षा कारणों से एन्क्लोजर के भीतर मोबाइल फोन को छोड़कर अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, पावर बैंक, पानी की बोतल, बैग और ज्वलनशील पदार्थों के ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे फ्रिस्किंग पॉइंट्स पर सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत ‘112’ नंबर पर साझा करें।

