राहुल गांधी के दौरे को उतनी तवज्जो क्यों नहीं?

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

इंदौर के दूषित जल हादसे को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने आए लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को यहां वह रिस्पांस नहीं मिला जिसकी उम्मीद लेकर आए थे. वे मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर उठाना चाहते थे, पर उन्हें वैसा साथ नहीं मिला जैसी कांग्रेस को अपेक्षा थी. प्रदेश सरकार के हादसे के बाद उठाए गए कदम से संतुष्ट नागरिकों ने कोई शिकायत नहीं रखी. स्थानीय कांग्रेस की लचर रणनीति से राहुल गांधी का जनता में आंदोलन पैदा करने की बजाए एक सामान्य दौरा बनकर रह गया.

चंद नेताओं को लेकर चलने की नीति भारी पड़ गई. यदि कार्यकर्ताओं से दूरी मिटाकर उनका लवाजमा साथ होता तो बात कुछ और होती व लोगों में भरोसा भी पैदा होता. स्थानीय नेताओं की नासमझ नीति ने तो राहुल गांधी का खेल बिगाड़ा ही, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का राहुल के दौरे से पूर्व लाशों पर राजनीति का नैरेटिव सेट करना कारगर रहा. मोहन यादव की इस रणनीति का इतना दबाव रहा कि राहुल गांधी को खुद कहना पड़ा कि वे राजनीति करने नहीं, पीड़ा सुनने तथा पीडि़तों की मदद करने आए हैं.

ताई के निशाने पर कौन?

इंदौर शहर की दो ध्रुवीय राजनीति आज भी बरकरार है. समय के साथ इसके खत्म होने का अहसास होने लगा था, दूषित जल हादसे के बाद फिर सतह पर आ गई. ताई की अगुवाई और 2 नंबर में बंटी सियासत पूर्व लोकसभा अध्यक्ष व 8 बार की सांसद सुमित्रा महाजन (ताई) के सक्रिय राजनीति से विश्राम के कारण सुप्तावस्था में चसी गई थी. वे मार्गदर्शक की भूमिका में रही, लेकिन कोई उनके पास सलाह-मशविरा के लिए गया हो, ऐसा नहीं दिखा. जब भागीरथपुरा कांड सामने आया और समर्थन मांगने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी उनके पास पहुंचे तो ताई की व्यथा फूट पड़ी. नगर की सियासत में ह्स्तक्षेप से दूर चुप्पी साधे बैठीं ताई ने पटवारी को कांड को उचित मंच पर उठाने के संदेश राहुल गांधी तक पहुंचाने की सलाह दे डाली. स्पष्ट है कि उनका इशारा किनको घेरने के लिए रहा.


चर्चा में प्रहलाद पटेल का आगर दौरा

हाल ही में पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल आगर मालवा जिले के निपानिया बैजनाथ में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में शिरकत करने आए थे. सम्मेलन के दौरान उन्होंने नदियों के संरक्षण, पर्यावरण, युवाओं की भूमिका और भ्रष्टाचार पर खुलकर बात की. साथ ही राजनीति में सच्चाई की आवश्यकता का पाठ भी पढ़ाया. उन्होंने अपनी प्राकृतिक धरोहर नदियों के पुनर्जीवन, संरक्षण के लिए योगदानकी बात कहने के साथ इनके आसपास बन रहे सीमेंट कांक्रीट के जंगल खड़े करने का विरोध भी किया. उन्होंने इस अवसर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी की नदियां जोड़ो अवधारणा और प्रयास की तारीफ की. करीब आधे घंटे के भाषण में उन्होंने मोदी और अटलजी का नाम कई बार लिया, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम एक बार भी नहीं लिया गया. अब क्षेत्र में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पटेल ने भाषण में आखिर मुख्य मंत्र का नाम लेने से परहेज क्यों किया.

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