सतना: स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से बने साइकिल ट्रैक को तोड़े जाने का काम शुरू हो गया है। शहर के पश्चिमी हिस्से में हाइवे के किनारे बनाए गए इस साइकिल ट्रैक पर सोमवार को जेसीबी मशीन चला दी गई। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई नाला निर्माण के चलते की जा रही है, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या से राहत मिलने का दावा किया जा रहा है।
पन्ना नाका स्थित कल्याण पेट्रोल पंप के पास पहले ही नाला निर्माण और रोड क्रॉसिंग के लिए पाइप डाली जा चुकी है, जबकि अब साइकिल ट्रैक वाली साइड में नाला बनाया जाना है। इसी वजह से ट्रैक को तोड़ा जा रहा है और इस नाले को आगे चलकर पतेरी नाला से जोड़ा जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्मार्ट सिटी योजनाओं की उपयोगिता और योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया, यह साइकिल ट्रैक शुरू से ही विवादों में रहा है।
पन्ना नाका से सोहावल तक बनाए गए इस ट्रैक पर साइकिल चलाने का उद्देश्य लगभग कभी पूरा नहीं हो सका। साइकिल चालकों के बजाय यह ट्रैक धीरे-धीरे अवैध कब्जों का केंद्र बन गया, जहां सब्जी ठेले, चाय-पान की दुकानें और वाहनों की पार्किंग आम नजारा बन गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह ट्रैक बनाया गया था, उस पर कभी गंभीरता से अमल नहीं हुआ।
जिम्मेदारों की दूरअंदेशी पर सवाल
अब नाला निर्माण के नाम पर इस साइकिल ट्रैक को तोड़े जाने से करोड़ों रुपये के खर्च पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही बेहतर योजना बनाई जाती और जल निकासी की समस्या को ध्यान में रखकर विकास कार्य किए जाते, तो आज इस तरह से बनी हुई संरचनाओं को तोडऩे की नौबत नहीं आती। स्मार्ट सिटी के नाम पर किए गए कई प्रोजेक्ट्स पहले ही जनता की आलोचना का सामना कर रहे हैं और साइकिल ट्रैक का यह हश्र उसी कड़ी का एक और उदाहरण माना जा रहा है।
कितना कारगर साबित होगा दावा
निगम प्रशासन का तर्क है कि नाला निर्माण के बाद उमरी क्षेत्र में होने वाले भारी जलभराव से राहत मिलेगी, जो बरसात के मौसम में लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता रहा है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस राहत के लिए पहले से बनी करोड़ों की संरचना को नष्ट करना ही एकमात्र विकल्प था। शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि स्मार्ट सिटी के तहत किए गए कई कार्य न तो जमीनी जरूरतों के अनुरूप हैं और न ही दीर्घकालिक योजना का हिस्सा, जिसके चलते बार-बार बदलाव और तोडफ़ोड़ करनी पड़ रही है।
