नयी दिल्ली, 19 जनवरी (वार्ता) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर यहां राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। आधिकारिक सूचना के अनुसार समिति की यह 88वीं बैठक सोमवार को यहां हुई जिसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत, संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में और उसके आसपास स्थित सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, रक्षा आवश्यकताओं और अवसंरचना विकास से संबंधित 70 प्रस्तावों पर विचार किया। इन प्रस्तावों पर पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक सेवाओं को सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में समिति ने जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा, सड़कों का चौड़ीकरण, 4जी मोबाइल टावर की स्थापना और ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण जैसे सार्वजनिक उपयोगिता के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश में मध्यम सिंचाई परियोजना से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार किया गया। यह परियोजना एक तरफ बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई जल की बेहतर आपूर्ति प्रदान करने का उद्देश्य रखती है, तो दूसरी तरफ वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए उन्नत जल प्रबंधन को बढ़ावा देने में सहायक है।
समिति ने सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों लद्दाख और सिक्किम में रणनीतिक अवसंरचना से संबंधित 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया। समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव संरक्षण उपायों और पर्यावरण सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए समिति के निर्देशों और लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप इन प्रस्तावों की अनुशंसा की इससे पहले की बैठकों में समिति ने जो निर्णय लिए उनको लेकर जारी निर्देशों के आधार की गई कार्रवाई की रिपोर्ट की भी समीक्षा की गयी। इसमें विशेष रूप से नीतिगत सुधारों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘परिवेश पोर्टल’ को बेहतर बनाना भी शामिल है। बैठक में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी नीतियों, कार्यक्रमों और निर्देशों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया।

