म्यूचुअल फंड में अब कैश से भी कर सकेंगे निवेश, सेबी ने छोटे निवेशकों और किसानों के लिए तय की 50,000 रुपये की सीमा, जानें निवेश की पूरी प्रक्रिया

भारतीय बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेश को और अधिक समावेशी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण नियम लागू किया है। आमतौर पर म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए नेट बैंकिंग या चेक का उपयोग होता है, लेकिन अब ऐसे लोग भी निवेश कर सकते हैं जिनके पास बैंकिंग सुविधाओं तक आसान पहुंच नहीं है। नियम के अनुसार, जो व्यक्ति करदाता की श्रेणी में नहीं आते या जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, वे भी म्यूचुअल फंड में पैसा लगा सकते हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से छोटे किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्र के उन छोटे व्यापारियों के लिए शुरू की गई है, जो अपनी छोटी बचत को सुरक्षित और लाभकारी बनाना चाहते हैं।

म्यूचुअल फंड में नकद निवेश के लिए एक निश्चित वित्तीय सीमा निर्धारित की गई है। सेबी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एक निवेशक एक वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम 50,000 रुपये तक ही नकद राशि जमा कर सकता है। यह छूट ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के प्रावधानों के तहत दी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस श्रेणी में छोटे व्यापारियों के अलावा उन नाबालिगों को भी शामिल किया गया है, जो अपने अभिभावकों के माध्यम से निवेश करना चाहते हैं। यह पहल देश के उन दूरदराज इलाकों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है, जहाँ अभी भी डिजिटल लेनदेन का प्रचलन कम है।

म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यहाँ विशेषज्ञों द्वारा फंड का प्रबंधन किया जाता है, जिससे जोखिम कम और रिटर्न की संभावनाएं बेहतर होती हैं। छोटे निवेशक अब बिना किसी जटिल बैंकिंग प्रक्रिया के सीधे फंड हाउस के अधिकृत केंद्रों पर जाकर अपनी दैनिक या मासिक कमाई का हिस्सा नकद जमा कर सकते हैं। इससे न केवल आम आदमी की शेयर बाजार तक पहुंच आसान हुई है, बल्कि ‘सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान’ (SIP) के जरिए भविष्य के लिए बड़ी पूंजी जुटाना भी संभव हो गया है। सरकार और सेबी का यह कदम अंतिम छोर तक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

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