हीरोइन बनने आईं, वैम्प बनकर छाईं, बचपन में ही संभाला घर

मशहूर वैम्प अभिनेत्री बिंदु का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल है। बचपन में ही परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाली बिंदु ने हीरोइन बनने का सपना छोड़ा और वैम्प किरदारों से पहचान बनाई।

बॉलीवुड में वैम्प की भूमिका को नई पहचान देने वाली अभिनेत्री बिंदु का नाम आते ही 70 के दशक की बोल्ड, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली अदाकारा की छवि सामने आ जाती है। ‘मोना डार्लिंग’ जैसे किरदार से दर्शकों के दिल-दिमाग पर छा जाने वाली बिंदु का सफर आसान नहीं था। कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ, निजी जिंदगी के अधूरे सपने और समाज की सोच के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

16 अप्रैल 1941 को गुजरात में जन्मी बिंदु का रिश्ता सिनेमा से जन्म से ही जुड़ा था। उनके पिता नानूभाई देसाई जाने-माने फिल्म निर्माता थे, जबकि मां ज्योत्सना थिएटर अभिनेत्री थीं। हालांकि, पिता चाहते थे कि बिंदु फिल्मों से दूर रहकर डॉक्टर बनें। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। महज 13 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी बिंदु पर आ गई। आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण उन्हें बचपन बहुत जल्दी छोड़ना पड़ा।

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