
जबलपुर: हाईकोर्ट में आंगनवाडी कार्यकर्ता के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित को बालिग बताते हुए पास्को एक्ट में दी गयी आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन पाया कि बचाव पक्ष की मदद के लिए सर्वे के दस्तावेज बाद में तैयार किये गये है। युगलपीठ ने डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर छतरपुर को निर्देशित किया है कि संबंधित महिला आंगनवाडी कार्यकर्ता की भूमिका के संबंध में जांच करे। जांच में कथित सर्वे रिपोर्ट फर्जी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाये।
छतरपुर निवासी अनिल अग्निहोत्री की तरफ से पास्को, बलात्कार व अपहरण के तहत दोषी करार देते हुए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने को चुनौती दी गयी थी। अपीलकर्ता की तरफ से सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि साल 2005 में सर्वे किया गया था, जिसके अनुसार उस समय पीड़िता की उम्र 3 साल थी। इस हिसाब से घटना के समय पीडित की उम्र 18 साल से अधिक थी।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सर्वे के कवर पेज, जिसमें पंजीयन क्रमांक एक लिखा है, आंगनवाड़ी सहायिका या सेक्टर सुपरवाइज़र का नाम और उनका पता नहीं है। इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमति मालती अहिरवार के हस्ताक्षर नही है। जन्म की तारीख का दस नंबर का कॉलम खाली है। पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोर्ट के सामने झूठे सबूत दे रही थी। उसका सर्टिफिकेट भी विरोधाभासों से भरा है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किये। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जांच तीस दिनों में की जाये।
