ट्रेड वॉर का नया मोर्चा: चीन का ‘रेयर अर्थ’ हथियार, भारत की चुनौती और आत्मनिर्भरता की राह – सामरिक खनिज सुरक्षा

चीन का रेयर अर्थ धातुओं पर वैश्विक एकाधिकार, निर्यात प्रतिबंधों से बढ़ी चुनौती; भारत की ₹5,000 करोड़ की योजना और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर जोर।

नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक परिदृश्य में ‘रेयर अर्थ’ धातुएं (Rare Earth Metals) एक नया और शक्तिशाली हथियार बनकर उभरी हैं, विशेषकर चीन के संदर्भ में। ये 17 तत्व, जिनमें स्कैंडियम, येट्रियम और 15 लैंथेनाइड तत्व शामिल हैं, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), पवन टर्बाइन, रक्षा उपकरण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। विडंबना यह है कि अपने नाम के विपरीत, ये धातुएं पृथ्वी की पपड़ी में दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन आर्थिक रूप से व्यवहार्य मात्रा में इन्हें निकालना और परिष्कृत करना बेहद जटिल और महंगा है। इसी जटिलता का फायदा उठाकर चीन ने वैश्विक रेयर अर्थ बाजार पर लगभग एकाधिकार स्थापित कर लिया है।

वर्तमान में, चीन वैश्विक रेयर अर्थ खनन का लगभग 60-70% और प्रसंस्करण/शोधन क्षमता का 85-90% नियंत्रित करता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि रेयर अर्थ मैग्नेट (जैसे नियोडिमियम आयरन बोरॉन – NdFeB) के निर्माण में चीन का 90% से अधिक हिस्सा है, जो ईवी मोटर और नवीकरणीय ऊर्जा जनरेटर के लिए महत्वपूर्ण हैं। अप्रैल 2025 में चीन द्वारा कुछ महत्वपूर्ण रेयर अर्थ तत्वों और संबंधित मैग्नेट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में खलबली मचा दी है, खासकर ऑटोमोबाइल और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में। यह एक स्पष्ट संकेत है कि चीन इन खनिजों को एक रणनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहा है, जिससे उन देशों के लिए गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं जो इन पर अत्यधिक निर्भर हैं, और भारत उनमें से एक है।

भारत की आत्मनिर्भरता की ओर कदम: घरेलू उत्पादन और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी पर जोर

भारत के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है, जिसका अनुमान 6.9 मिलियन मीट्रिक टन है, लेकिन 2023 में इसका उत्पादन केवल 2,900 मीट्रिक टन था। यह विरोधाभास भारत की कमजोर प्रसंस्करण क्षमता और घरेलू उत्पादन की कमी को उजागर करता है, जिससे वह रेयर अर्थ धातु यौगिकों का 17वां सबसे बड़ा आयातक बन गया है। रक्षा आधुनिकीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की भारत की महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए, रेयर अर्थ तत्वों की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। चीन पर इस तीव्र निर्भरता को कम करने के लिए, भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

हाल ही में, भारत ने ₹3,500 से ₹5,000 करोड़ की एक नई योजना तैयार की है, जिसका उद्देश्य रेयर अर्थ खनिजों और उनसे प्राप्त होने वाले मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन और घरेलू स्तर पर निर्मित मैग्नेट की लागत और चीनी आयातित मैग्नेट की लागत के बीच के अंतर को आंशिक रूप से वित्त पोषित करने की परिकल्पना की गई है। इसके अतिरिक्त, नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) को 2024-25 से 2030-31 तक सात साल की अवधि के लिए ₹16,300 करोड़ के प्रस्तावित व्यय के साथ लॉन्च किया गया है, जिसका लक्ष्य महत्वपूर्ण खनिजों की एक लंबी अवधि और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है। खानिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) जैसी संयुक्त उद्यम कंपनियों के माध्यम से विदेशों में खनिज संपत्तियों का अधिग्रहण करने की भी योजना है। इन प्रयासों से भारत को चीन के एकाधिकार को चुनौती देने और अपनी सामरिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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