नई दिल्ली | 15 जनवरी, 2026: पश्चिम बंगाल में केंद्र और राज्य सरकार के बीच कानूनी जंग अब सुप्रीम कोर्ट के दहलीज पर पहुँच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार को तुरंत निलंबित करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी को कोलकाता में आईपैक (I-PAC) कार्यालय पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीजीपी राजीव कुमार ने पुलिस बल के साथ मिलकर केंद्रीय अधिकारियों को उनका कर्तव्य निभाने से रोका। एजेंसी ने इसे कानून की गंभीर अवहेलना और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करार दिया है।
यह पूरा विवाद 2,742 करोड़ रुपये के कोयला चोरी घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच से शुरू हुआ। ईडी का दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर पहुँचीं और कथित तौर पर महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त कर लिए, जिससे जांच प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई। याचिका में ईडी ने डीजीपी राजीव कुमार के पुराने आचरण का भी हवाला दिया है और मांग की है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए। दूसरी ओर, बंगाल सरकार ने कैविएट दाखिल कर मांग की है कि बिना उनका पक्ष सुने कोई एकतरफा आदेश पारित न किया जाए।
2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई को तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट आज इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करेगी, जिसमें गृह मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय को भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की गई है। इस सुनवाई के नतीजे राज्य की कानून-व्यवस्था और आगामी चुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

