अमेरिका को पीछे छोड़ इस वर्ष दूसरा सबसे बड़ा सोलर बाजार बन जाएगा भारत: रिपोर्ट

मुंबई, 14 जनवरी (वार्ता) भारत का सौर ऊर्जा क्षमता निर्माण बाजार 2026 में छह प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा सोलर बाजार बन जाएगा। वैश्विक जिंस बाजार अनुसंधान फर्म ब्लूमबर्गएनईएफ (बीएनईएफ) की बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की सौर ऊर्जा क्षमता निर्माण की वर्तमान गति से 2030 तक पांच लाख मेगावाट की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य लगता है लेकिन 2024 में नीलाम कई परियोजनाओं को अब भी बिजली के खरीदारों का इंतजार है जो लक्ष्य की राह में एक जोखिम है। इसमें सौर ऊर्जा मॉड्यूल की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही इनके निर्माण में कुछ कच्चे माल और हिस्से पुर्जों के लिए आयात निर्भरता बनी हुई है।
बीएनईएफ की ओर से मीडिया को उपलब्ध करायी गयी इस रिपोर्ट के सारांश में कहा गया है कि इस वर्ष चीन की धीमी गति पड़ेगी और इससे पहली बार वैश्विक सोलर निर्माण में कुल मिला कर कमी होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सौर निर्माण बाजार में तेज गिरावट दिख रही है और 2026 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर बाजार बनने के लिए तैयार है। अमेरिका में गिरावट के बीच सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन (स्थापना) में नाम मात्र की वृद्धि जारी है । बीएनईएफ के अनुमान के अनुसार भारत में सौर बिजली क्षमता निर्माण छह प्रतिशत की वृद्धि के साथ 50,000 मेगावाट से थोड़ा अधिक रहेगा। देश में अधिकांश नयी क्षमता बड़ी परियोजनाओं के माध्यम बनेगी। इसके अलावा सरकारी सब्सिडी से आवासीय रूफटॉप सौर प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है। अमेरिका में जनकल्याण योजनाओं पर सब्सिडी की कटौती वाले ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट’के कारण इस साल वहां सौर बिजली स्थापना में 14 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। इस विधेयक के अंतर्गत अमेरिका में नये वर्ष में शुरू होने वाली परियोजनाओं को कम लाभ के लिए विदेशी संस्था से संबंधित नियमों का पालन करना होगा, जिससे परियोजना विकास करने वाली कंपनियों के लिए एक और बाधा पैदा होगी। इससे अमेरिका सौर ऊर्जा क्षमता निर्माण में भारत से पीछे आ जाएगा जबकि वह 2019 से लगातार दूसरे स्थान पर था।
चीन वार्षिक वृद्धि में अपेक्षित गिरावट के बावजूद, काफी बड़े अंतर से दुनिया का सबसे बड़ा सोलर बाजार बना हुआ है। बीएनईएफ का अनुमान है कि चीन में 2026 में 3,21,000 मेगावाट की नयी स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता होगी। यह पिछले साल से 14 प्रतिशत कम है।

भारत में पिछले वर्ष नवंबर में समाप्त पहले 11 महीनों में भारत में 35,000 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गयी जो एक रिकार्ड है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में नई सौर क्षमता निर्माण की यह रफ्तार 2030 तक 5,00,000 मेगावाट खनिज ईंधनों से मुक्त बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को साध्य बना रही है। अडानी ग्रीन एनर्जी, एनटीपीसी, रीन्यू, अवाडा और टाटा पावर देश की शीर्ष सौर ऊर्जा उत्पाक कंपनियों में हैं और देश में बिजली के विभिन्न स्रोतों में सौर पैनल वाली ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी से इन कंपनियों को फायदा होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का नीलामी कार्यक्रम इस क्षेत्र की तीव्र वृद्धि को मजबूत आधार दे रहा है। रिपोर्ट में जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि भारत ने 2024 में रिकॉर्ड 60,000 मेगावाट की नवीकरणीय क्षमताओं वाली परियोजनाएं नीलाम कीं। इनमें से 42,000 मेगावाट की परियोजनाएं बिजली खरीद के पक्के अनुबंधों की प्रतीक्षा में हैं।इनका भविष्य इन प्रस्तावित अनुबंधों पर टिका है। इसमें 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के समग्र लक्ष्य को पूरा करने में जोखिम भी छुपा है।
बीएनईएफ के अनुसार भारत सरकार फोटोवोल्टिक (पीवी सेल्स) सप्लाई चेन में स्थानीय मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित कर रही है। परियोजनाओं में उन्हीं पीवी मॉड्यूल्स का इस्तेमाल करने की शर्त जोड़ी जाती है जो सरकार द्वारा स्वीकृत मॉडलों विनिर्माताओं की सूची (एएलएमएम) में हैं। इससे आयात में बाधा हुई है तथा घरेलू विनिर्माण में निवेश तेज हुआ है। वारी एनर्जीज, विक्रम सोलर और प्रीमियर एनर्जीज जैसे प्रमुख सोलर विनिर्माता पिछले दो सालों में सामने आए हैं और भविष्य में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए सार्वजनिक निर्गम से पूंजी जुटाने की सोच रहे हैं। भारत में पीवी मॉड्यूल बनाने की क्षमता सालाना लगभग 1,25,000 मेगावाट की है जो जरूरत से अधिक है। मॉड्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाली प्राथमिक या माध्यमिक सामग्री और हिस्से-पुर्जे की स्थानीय आपूर्ति क्षमता घरेलू मांग से कम है, जिससे आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

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